कर्नाटक में रह रहे हिंदी भाषी लोगों को दैनिक जीवन में आने वाली भाषा संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से राजस्थान पत्रिका एवं श्री जैन राजस्थानी विद्या प्रचारक मंडल के संयुक्त तत्वावधान में निशुल्क स्पोकन कन्नड़ क्लास शुरू की जा रही है। इस कक्षा में हिंदी माध्यम से सरल एवं व्यावहारिक तरीके से कन्नड़ बोलना सिखाया जाएगा।

कर्नाटक में रहें, कन्नड़ से जुड़ें
श्री जैन राजस्थानी विद्या प्रचारक मंडल के चेयरमैन भवरलाल सी. जैन लक्की सिवाना ने बताया कि हुब्बल्ली सहित उत्तर कर्नाटक में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद अनेक लोगों, विशेषकर महिलाओं को, कन्नड़ बोलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। बाजार में खरीदारी, सरकारी कार्यालयों में कामकाज, पड़ोसियों से संवाद या दैनिक जीवन के अन्य कार्यों में भाषा एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
हिंदी से सीखें आसान कन्नड़
इस कक्षा में कन्नड़ भाषा की शुरुआत बिल्कुल प्रारंभिक स्तर से कराई जाएगी। ऐसे लोगों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तैयार किया गया है जिन्हें कन्नड़ बोलना बिल्कुल नहीं आता या बहुत कम आती है। सरल शब्दों, रोजमर्रा के संवादों और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से कन्नड़ बोलना सिखाया जाएगा।
महिला-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी के लिए खुला अवसर
इस कक्षा में भाग लेने के लिए किसी आयु वर्ग की सीमा नहीं है। महिला, पुरुष, विद्यार्थी, गृहिणी, व्यापारी, नौकरीपेशा या वरिष्ठ नागरिक कोई भी इसमें शामिल हो सकता है। प्रशिक्षण के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
हर शनिवार लगेगी एक घंटे की कक्षा
स्पोकन कन्नड़ क्लास प्रत्येक शनिवार दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक आयोजित की जाएगी। कक्षाएं घंटीकेरी स्थित शांतिनिकेतन अंग्रेजी माध्यम स्कूल में संचालित होंगी।
27 जून को होगा उद्घाटन
इस पहल का उद्घाटन समारोह शनिवार, 27 जून को दोपहर 3 बजे शांतिनिकेतन अंग्रेजी माध्यम स्कूल के सभागार में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न प्रवासी समाजों, सामाजिक संस्थाओं तथा महिला संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
भाषा सीखें, आत्मविश्वास बढ़ाएं
भवरलाल सी. जैन ने कहा कि वर्तमान में हुब्बल्ली में हिंदी भाषियों को व्यवस्थित रूप से हिंदी माध्यम से कन्नड़ सिखाने वाली सुविधाएं बहुत कम हैं। ऐसे में यह पहल हजारों लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। कन्नड़ सीखने से न केवल दैनिक जीवन आसान बनेगा, बल्कि स्थानीय समाज से जुड़ाव और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।