
सामूहिक कक्षा में महिलाओं को परमात्मा की भक्ति और पूजा-पाठ के महत्व के साथ उसकी विधि की जानकारी दी जाती है। आंगी एवं परमात्मा की पूजा, पूजा के विभिन्न राग, पंच कल्याणक तथा धार्मिक सूत्रों जैसे विषयों का अध्ययन कराया जाता है। पूजा की विधि जानने के साथ उसके पीछे की भावना और धार्मिक सिद्धांतों को समझने पर भी जोर दिया जाता है। महिलाओं को बताया जाता है कि नियमित धार्मिक अध्ययन और परमात्मा की भक्ति जीवन में अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कारों को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।
कक्षा में धार्मिक शिक्षा के साथ पारिवारिक जीवन से जुड़े व्यवहारिक पहलुओं पर भी चर्चा होती है। विवाह के बाद परिवार के सदस्यों के साथ सामंजस्य बनाए रखने, बड़ों का सम्मान करने और आपसी स्नेह व समझ के साथ रहने की सीख दी जाती है। महिलाओं को विनम्रता, संयम और सद्व्यवहार को पारिवारिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। धार्मिक शिक्षाओं को दैनिक व्यवहार से जोड़ते हुए समझाया जाता है कि संस्कार केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि घर-परिवार के व्यवहार में भी दिखाई देने चाहिए।
करीब दो वर्षों से महिलाओं के लिए यह सामूहिक धार्मिक शिक्षा जारी है। सप्ताह में दो दिन होने वाली कक्षा में महिलाएं नियमित रूप से शामिल होकर धार्मिक विषयों का अध्ययन करती हैं। सामूहिक अध्ययन से उन्हें एक-दूसरे से सीखने और धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर भी मिलता है। रंजीत गुरुजी, धार्मिक शिक्षक ने बताया कि कक्षा का उद्देश्य महिलाओं को धार्मिक विषयों की जानकारी देने के साथ धर्म के सिद्धांतों को उनके दैनिक जीवन और पारिवारिक व्यवहार से जोड़ना है।