कत्लखानों की ओर जा रही गायों को बचाकर नया जीवनहुब्बल्ली के गदग रोड स्थित बालाजी गौशाला आज गौसेवा और संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बन चुकी है। यहां कत्लखानों की ओर जा रही गायों को बचाकर नया जीवन दिया जा रहा है। यहां गौशाला के प्रमुख सेवक अयोध्यादास बैरागी, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के […]
कत्लखानों की ओर जा रही गायों को बचाकर नया जीवन
हुब्बल्ली के गदग रोड स्थित बालाजी गौशाला आज गौसेवा और संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बन चुकी है। यहां कत्लखानों की ओर जा रही गायों को बचाकर नया जीवन दिया जा रहा है। यहां गौशाला के प्रमुख सेवक अयोध्यादास बैरागी, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, पिछले कई वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ गायों की सेवा कर रहे हैं। इसके साथ ही कई श्रद्धालु रोजाना गायों की सेवा में जुटे रहते हैं, जिससे यह स्थान श्रद्धा और सेवा का केंद्र बन गया है। सेवाभाव और समर्पण से चल रही यह गौशाला न केवल पशु संरक्षण का कार्य कर रही है, बल्कि समाज को सेवा, करुणा और संरक्षण का संदेश भी दे रही है।
चारे की व्यवस्था के लिए बिदनाल के पास खेती
बालाजी गौशाला में वर्तमान में लगभग 150 गायें, बछड़े और सांड सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें से अधिकांश गायों को कत्लखानों में ले जाए जाने से बचाकर यहां लाया गया और उन्हें नया जीवन दिया गया। गौशाला में गायों को रोज हरा चारा, सूखा चारा, ज्वार और दाना खिलाया जाता है। चारे की व्यवस्था के लिए बिदनाल के पास खेती भी की जा रही है, जिसका पूरा उत्पादन गौशाला और अन्य जरूरतमंद गौशालाओं के लिए उपयोग में लाया जाता है।
गायों को चूनरी ओढ़ाकर लेते हैं आशीर्वाद
शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां आकर गौसेवा करते हैं। अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी जैसे अवसरों पर महिला समूह विशेष रूप से यहां पहुंचकर गायों को गुड़, रोटी, हरा चारा और फल खिलाते हैं तथा पूजा-अर्चना कर चूनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं।
गोबर के कंडे हवन-पूजन के लिए निशुल्क उपलब्ध
गौशाला में समय-समय पर हवन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। यहां तैयार किए जाने वाले गोबर के कंडे हवन-पूजन के लिए निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे धार्मिक कार्यों में भी गौसेवा का महत्व जुड़ता है।