
संस्कारशाला में नन्ही बालिका टिंवकल चौधरी ने हनुमान चालीसा का वाचन किया। अन्य बच्चों ने भी मंच पर आकर विभिन्न श्लोकों, कविताओं, अच्छे वाक्यों, भजनों और दोहों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को छोटी उम्र से ही संस्कारों, धार्मिक ज्ञान और सकारात्मक विचारों से जोड़ना रहा।
बाबा रामदेव बाल सत्संग सुधा के संस्थापक सदस्य बालकृष्ण सराफ ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों और दोहों का महत्व बताते हुए बच्चों को धार्मिक ग्रंथों एवं साहित्य की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को इनके संदेशों को समझने और जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
संस्था के वरिष्ठ सदस्य भूरसिंह राजपुरोहित पटाऊ ने संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को जीवन में छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने अच्छे व्यवहार, विनम्रता और बड़ों के सम्मान जैसे गुणों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की सीख दी।
मुंबई से आई हेमलता सुरेखा ने दैनिक जीवन में अनुशासन, अच्छे व्यवहार और नैतिक मूल्यों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि अच्छी बातें केवल सुनने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और दिनचर्या में भी अपनाना चाहिए।
आंजणा पटेल समाज सेवा संघ हुब्बल्ली-धारवाड़ के वरिष्ठ सदस्य वागाराम और बाबा रामदेव बाल सत्संग सुधा के वरिष्ठ सदस्य राजेश रावल ने भी बच्चों को अच्छे आचरण और संस्कारपूर्ण जीवन की सीख दी।
इस अवसर पर संस्कारशाला महिला मंडल की सदस्य छगनकंवर राजपुरोहित पटाऊ विशेष रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन ने बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही संस्कारों को जीवन में अपनाने और अन्य बच्चों को भी अच्छी आदतों के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।