
राजस्थान पंचायतीराज चुनाव को लेकर राजस्थान पत्रिका की परिचर्चा में अपने विचार रखते प्रवासी। (फोटो तीन कॉलम)
चुनाव के बीच ग्रामीण विकास, पेयजल, सड़क, स्वच्छता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ निष्पक्ष चुनाव और योग्य जनप्रतिनिधियों का चयन भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसी सिलसिले में राजस्थान पत्रिका की परिचर्चा में प्रवासियों ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि गांव की सरकार में जातिवाद और परिवारवाद के बजाय योग्यता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भ्रष्टाचार, धनबल और मतदाताओं को प्रलोभन देने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत है। प्रवासियों ने पर्व-त्योहारों के बीच चुनाव कार्यक्रम तय करने पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि दीपावली के आसपास कारोबार की व्यस्तता और रेल टिकटों की कमी के कारण कई प्रवासी अपने गांव पहुंचकर मतदान नहीं कर पाएंगे।
जातिवाद से ऊपर उठकर चुनें योग्य उम्मीदवार
थोब, जिला बालोतरा निवासी दूदाराम चौधरी ने कहा, जनप्रतिनिधि गांव का भविष्य तय करता है। जाति के आधार पर उम्मीदवार खड़े करने से जातिवाद को बढ़ावा मिलता है। चुनाव में जाति के बजाय उम्मीदवार की योग्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। योग्य प्रतिनिधि चुनकर आएंगे, तभी गांव का बेहतर विकास हो सकेगा।
पर्व-त्योहारों के बीच चुनाव से प्रवासियों की भागीदारी होगी प्रभावित
गोलिया चौधरियान निवासी किशोर पटेल ने कहा, तीज-त्योहारों के समय चुनाव नहीं करवाए जाने चाहिए। राजस्थान में पंच-सरपंच, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव पर्वों के बीच होने से प्रवासियों की मतदान में भागीदारी प्रभावित होगी। कई प्रवासी हर चुनाव में अपने गांव जाकर मतदान करते हैं, लेकिन दीपावली और अन्य त्योहारों के कारण इस बार उनके लिए गांव पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
रेल टिकटों की कमी और कारोबार की व्यस्तता बनेगी मतदान में बाधा
बिठूजा, राजस्थान निवासी मालाराम देवासी ने कहा, उनकी ग्राम पंचायत में दीपावली के बाद चुनाव हैं, लेकिन कई पंचायतों में इससे पहले मतदान होगा। ऐसे में अनेक प्रवासी मतदान के लिए राजस्थान नहीं जा पाएंगे। दीपावली के आसपास कारोबार चरम पर रहता है और रेलगाड़ियों में टिकट मिलना भी मुश्किल होता है। पंचायत चुनाव जातिवाद से दूर और निष्पक्ष तरीके से होने चाहिए।
रिश्वत और प्रलोभन देने वाले उम्मीदवारों का हो बहिष्कार
चौरा निवासी पर्बतसिंह चौहान ने कहा, मतदाताओं को रिश्वत देने या किसी तरह का प्रलोभन देकर वोट हासिल करने वाले उम्मीदवारों का बहिष्कार करना चाहिए। मतदान बिना किसी लोभ-लालच के होना चाहिए। सरकार को भी ऐसे उम्मीदवारों पर नजर रखनी चाहिए, जो मतदाताओं को लुभाने के लिए अनुचित तरीके अपनाते हैं।
परिवारवाद खत्म हो, स्वच्छ राजनीति को मिले बढ़ावा
डेगाना निवासी अनिल कुमार सुराणा ने कहा, चुनाव में परिवारवाद खत्म होना चाहिए और स्वच्छ राजनीति को बढ़ावा मिलना चाहिए। दीपावली के आसपास कारोबार अपने चरम पर होता है। ऐसे में प्रवासी कारोबारियों के लिए चुनाव के दौरान राजस्थान जाना और मतदान करना मुश्किल हो जाता है। चुनाव कार्यक्रम तय करते समय प्रवासियों की परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
सरपंच चुनाव में लाखों के खर्च पर लगे रोक
सिवाना निवासी रणछोड़मल राठौड़ ने कहा, सरपंच चुनाव में लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं, जबकि निर्धारित खर्च सीमा केवल एक लाख रुपए है। ऐसे में कई उम्मीदवारों के लिए इस सीमा में चुनाव लड़ना मुश्किल होता है और वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक हो जाता है। चुनावी खर्च पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
पंचायत से संसद तक भ्रष्टाचार पर लगे अंकुश
होतरड़ा निवासी तांबाराम चौधरी ने कहा, पंचायत से लेकर संसदीय चुनाव तक भ्रष्टाचार पर रोक लगाना जरूरी है। निष्पक्ष मतदान के जरिए ईमानदार जनप्रतिनिधियों का चयन होना चाहिए। जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी से काम करेंगे, तभी गांव, प्रदेश और देश का समुचित विकास संभव होगा।
मताधिकार का करें उपयोग, त्योहारों से अलग हों चुनाव
चारलाई कलां निवासी ओमाराम चौधरी ने कहा, प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का उपयोग जरूर करना चाहिए। हालांकि, चुनाव ऐसे समय होने चाहिए, जब कोई बड़ा पर्व या त्योहार न हो। कारोबार में व्यस्त रहने वाले प्रवासियों के लिए त्योहारों के दौरान अपने गांव पहुंचना मुश्किल हो जाता है। चुनाव कार्यक्रम बनाते समय इस परेशानी को ध्यान में रखना चाहिए।
Updated on:
17 Oct 2026 09:50 pm
Published on:
17 Oct 2026 09:28 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
