21 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बच्चों को मिला सफलता का मंत्र: अच्छी आदतों के सात रंगों से संवरेगा भविष्य

बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और उनके व्यक्तित्व को निखारने के उद्देश्य से बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर, बेंगलूरु की ओर से हुब्बल्ली में बालक-बालिकाओं के लिए रैेनबो ऑफ हैबिट्स शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 8 से 14 वर्ष तक के बच्चों को जीवन में सकारात्मक आदतें अपनाने, अनुशासन बनाए रखने और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया गया।
2 min read
Google source verification
शिविर में मौजूद बच्चे।

शिविर में मौजूद बच्चे।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित उपयोग को लेकर किया जागरूक
अंजणा पटेल समाज सेवा संघ, हुब्बल्ली के सहयोग से आयोजित इस शिविर में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया। शिविर की परिकल्पना इस विचार पर आधारित रही कि बच्चों को अच्छी आदतों और जीवन मूल्यों की सीख देना उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गोकुल रोड स्थित राजेश्वर भवन परिसर में आयोजित शिविर में आत्मविश्वास, माता-पिता के प्रति प्रेम और आदर, स्वस्थ जीवनशैली, भावनाओं पर नियंत्रण, पढ़ाई में कठिन परिश्रम, प्रार्थना की शक्ति तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित उपयोग जैसे विषयों पर बच्चों को जागरूक किया गया। साथ ही बुरी संगत से दूर रहने, पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचने और नियमित प्रयास करने की प्रेरणा दी गई।

जीवनोपयोगी बातें समझाने पर जोर
कार्यक्रम में संवाद, क्विज, वीडियो शो और प्रेरणादायी प्रवचनों के माध्यम से बच्चों को जीवनोपयोगी बातें समझाने पर जोर रहा। योग और आध्यात्मिक गतिविधियों के जरिए शरीर और मन के बीच संतुलन बनाए रखने तथा सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश दिया गया।

छोटी अच्छी आदतों से जीवन में बड़ा बदलाव
रैनबो ऑफ हैबिट्स के माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें जीवन में बड़े बदलाव ला सकती हैं। माता-पिता के सम्मान, शिक्षा के प्रति समर्पण, आत्मसंयम और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर बच्चे अपने व्यक्तित्व को बेहतर बना सकते हैं। महंत स्वामी महाराज की प्रेरणा से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य बच्चों में संस्कार, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार, शिक्षा और आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका को रेखांकित किया।