
इस बार गणेशोत्सव की थीम अय्यप्पा स्वामी और शबरीमाला पर केंद्रित है। पंडाल के प्रवेश द्वार पर शबरीमाला मंदिर की आकृति तैयार की गई है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है। पंडाल के भीतर अय्यप्पा स्वामी की पूजा, मैसासुर मर्दिनी सहित विभिन्न धार्मिक प्रसंगों को विशेष शो के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है।
अय्यप्पा स्वामी पर आधारित विशेष शो शाम 6.30 बजे से देर रात तक चलाया जा रहा है। करीब पांच मिनट के इस शो में विभिन्न धार्मिक प्रसंगों को प्रकाश और दृश्य प्रभावों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। शो देखने के लिए श्रद्धालुओं से केवल 10 रुपए की सहयोग राशि ली जा रही है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए प्रवेश निशुल्क रखा गया है।
गणपति को धोती और शाल धारण कराई गई है। प्रतिमा की कमर पर चांदी का आभूषण तथा आशीर्वाद मुद्रा वाले हाथ पर किया गया चांदी का काम आकर्षण का केंद्र है। गणपति दरबार में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
मंडल की स्थापना के समय से ही मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा कायम है। इस वर्ष भी पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की गई है। गणेशोत्सव के दौरान प्रतिदिन पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। 12 दिन तक गणपति की स्थापना रहेगी।
गणपति दर्शन के साथ अय्यप्पा स्वामी पर आधारित विशेष शो देखने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंडल के अनुसार प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं।
गौतम अशोक टाके, संयुक्त सचिव, गणेश उत्सव मंडल ने बताया, मंडल की ओर से वर्ष 1972 से गणपति प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस बार 12 दिन तक गणपति की स्थापना रहेगी। अय्यप्पा स्वामी पर आधारित विशेष शो के माध्यम से भक्तों को धार्मिक प्रसंगों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
रजत रेवणकर, कार्यकर्ता ने बताया, गणपति दर्शन और विशेष शो के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं।