
मंदिर पदाधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में यहां छोटा-सा गणेश मंदिर था। समय के साथ क्षेत्र के व्यापारियों और श्रद्धालुओं की आस्था मंदिर से जुड़ती गई। इसके बाद मंदिर का विस्तार किया गया और इसे भव्य स्वरूप दिया गया। आज यह इंडस्ट्रीयल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों में शामिल है। मंदिर में गणेश महोत्सव के अलावा वर्षभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। त्योहारों के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मंदिर परिसर में भगवान हनुमान का मंदिर भी स्थित है। यहां हनुमान जयंती सहित अन्य धार्मिक पर्व श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं। हनुमानजी की प्रतिमा को भी चांदी की पोशाक पहनाई गई है। मंदिर परिसर में स्थित पीपल और बिल्वपत्र के पेड़ भी श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। भक्त इन पेड़ों की पूजा-अर्चना करते हैं और धार्मिक अवसरों पर विशेष रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर चेयरमैन मेहर सिंह ने बताया कि यह मंदिर लंबे समय से क्षेत्र के व्यापारियों और लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और छोटे मंदिर का विस्तार कर इसे भव्य स्वरूप दिया गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई व्यापारी नियमित रूप से मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और इसे अपने व्यवसाय की सफलता व समृद्धि से भी जोड़कर देखते हैं।
मंदिर के पुजारी एन.पी. हीरेमठ ने बताया कि मंदिर में नियमित रूप से धार्मिक आयोजन होते हैं। शहर के विभिन्न इलाकों से भक्त भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गणेश महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है। विशेष पूजा, आरती और श्रृंगार के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल रहता है।
पांच दिवसीय गणेश महोत्सव के दौरान प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और महामंगल आरती होगी। महोत्सव के समापन पर 18 सितंबर को गणेश प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।