हुबली

बंजर पड़ी 1600 एकड़ जमीन पर उगे 65 हजार पेड़, गांव का तापमान 3 डिग्री घटा, पलायन भी हुआ कम

कभी भीषण गर्मी में तपती बंजर जमीन, रोजगार का संकट और शहरों की ओर पलायन करते ग्रामीण... लेकिन आज कर्नाटक के कलबुर्गी जिले का होन्ना किरानागी गांव हरियाली की नई पहचान बन गया है। गांव के सदाशिव हाइड्रा की पहल और ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत से बंजर पड़ी जमीन पर हजारों पेड़ लहलहा रहे हैं। करीब एक लाख पौधे लगाने के संकल्प के तहत शुरू किए गए अभियान में अब तक 65 हजार पेड़ बड़े हो चुके हैं। इसका असर गांव के पर्यावरण के साथ ही लोगों की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है।
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Updated: 7 Sep 2026, 6:31 PM IST
बंजर भूमि बनी हरियाली की पहचान
बंजर भूमि बनी हरियाली की पहचान

बिजली परियोजना के लिए साफ हुई थी 1600 एकड़ जमीन

दरअसल, गांव की करीब 1600 एकड़ जमीन को एक बिजली संयंत्र परियोजना के लिए साफ किया गया था। बाद में परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी और जमीन लंबे समय तक बंजर पड़ी रही। गर्मियों में यहां की जमीन इतनी तपती थी कि लोगों के लिए पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता था। खेती और रोजगार के अवसर कम होने से कई ग्रामीण मजदूरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने लगे।

2015 में शुरू किया पौधरोपण अभियान

हालात बदलने के लिए सदाशिव हाइड्रा ने ग्रामीणों से गांव छोड़ने के बजाय गांव को ही बदलने की अपील की। वर्ष 2015 में ग्रामीणों के सहयोग से बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान शुरू किया गया। शुरुआत आसान नहीं थी। पहले चरण में लगाए गए करीब 20 हजार पौधे सूखे की भेंट चढ़ गए, लेकिन ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। पौधों को बचाने के लिए पानी की व्यवस्था की गई। इसके लिए करीब 18 किलोमीटर लंबी खाइयां खोदी गईं और भीषण गर्मी के दौरान पौधों तक पानी पहुंचाने का काम किया गया। लगातार प्रयासों के बाद अभियान को सफलता मिलने लगी।

40 फीट से अधिक ऊंचे हो चुके हैं पेड़

वर्षों की मेहनत के बाद अब करीब 65 हजार पेड़ 40 फीट से अधिक ऊंचे हो चुके हैं। बंजर और तपती जमीन अब हरियाली से ढक गई है। स्थानीय स्तर पर इसका असर तापमान पर भी दिखाई दिया है और गांव के आसपास का तापमान करीब तीन डिग्री तक कम होने की बात सामने आई है।

हरियाली के साथ लौटे रोजगार के अवसर

पेड़ों और हरियाली के बढ़ने के साथ गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर काम मिलने लगा, जिससे शहरों की ओर होने वाले पलायन में कमी आई। महिलाओं ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरने से बच्चों की पढ़ाई भी जारी रह सकी। एक व्यक्ति की पहल से शुरू हुआ यह अभियान आज पूरे गांव की तस्वीर बदलने की मिसाल बन गया है। होन्ना किरानागी गांव की कहानी बताती है कि सामूहिक प्रयास और लगातार मेहनत से बंजर जमीन ही नहीं, बल्कि लोगों की तकदीर भी बदली जा सकती है।

Updated on:
7 Sep 2026, 6:31 PM IST
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