कर्नाटक के यादगीर जिले में कन्नड़ भाषा को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। नम्म कर्नाटक सेना के कार्यकर्ताओं ने उन विज्ञापन और नामपट्टिकाओं (होर्डिंग्स) पर काला रंग पोत दिया, जिनमें निर्धारित नियम के अनुसार कन्नड़ भाषा का उपयोग नहीं किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नामफलक में 60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा अनिवार्य किए जाने वाले नियम का पालन नहीं हो रहा है।
कन्नड़ भाषा को प्राथमिकता देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान संगठन के जिला अध्यक्ष ने कहा कि जिले में लगे सभी विज्ञापन बोर्ड और नामपट्टिकाओं में 60:40 अनुपात का पालन होना चाहिए। उनका कहना था कि कन्नड़ भाषा को प्रमुख स्थान देना केवल सांस्कृतिक पहचान का सवाल नहीं, बल्कि कानून के पालन का विषय भी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि एक सप्ताह के भीतर जिलेभर में नियम लागू कराया जाए।
प्रशासन को दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय के भीतर नियम लागू नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन से जुड़े कार्यकर्ता मौजूद रहे और उन्होंने कन्नड़ भाषा के समर्थन में नारेबाजी भी की।
पहले भी उठता रहा है भाषा का मुद्दा
कर्नाटक में नामपट्टिकाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कन्नड़ भाषा के उपयोग को लेकर पहले भी कई बार आंदोलन हुए हैं। विभिन्न कन्नड़ समर्थक संगठन लगातार यह मांग करते रहे हैं कि व्यावसायिक बोर्डों पर कन्नड़ को प्रमुखता मिले और स्थानीय भाषा की पहचान बनी रहे। पिछले वर्षों में भी ऐसे विरोध प्रदर्शन राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिले थे।
भाषा बनाम पहचान की बहस फिर चर्चा में
यादगीर की इस घटना के बाद एक बार फिर कर्नाटक में भाषा, स्थानीय पहचान और नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर किस तरह कदम उठाता है।