हुब्बल्ली के देशपांडेनगर स्थित श्री गुजरात भवन में गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव के तृतीय दिवस गुरुवार को डोंगरेजी महाराज के शिष्य दीपकभाई शास्त्री ने सती प्रागट्य प्रसंग का भक्तिमय वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव की कथा का श्रवण करने से मनुष्य के हृदय में शिवत्व प्रकट होता है। जब भगवत स्वरूप को हृदय में स्थापित कर लिया जाता है, तब जीवन में नई जागृति आती है और व्यक्ति को यह विवेक प्राप्त होता है कि क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, कहां जाना चाहिए और किन मार्गों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का प्राकट्य भक्त के अंत:करण में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण के माध्यम से होता है। भगवत कथा का फल आत्मशुद्धि, मन की पवित्रता और जीवन के दुखों से मुक्ति है। कथा श्रवण करते-करते मनुष्य ईश्वर के अधिक निकट पहुंचता है और उसका जीवन धर्ममय बन जाता है।

भगवान शिव सबको देते हैं कुछ न कुछ
दीपकभाई शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव ऐसे करुणामय देव हैं, जो अपने भक्तों को सदैव कुछ न कुछ प्रदान करते रहते हैं। अधिक मास का विशेष महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह काल साधना और भक्ति का श्रेष्ठ समय है। वैशाख मास में विशेष पुण्य प्राप्त होता है तथा जेठ मास में भगवत कथा का श्रवण करने से जीवन के अनेक दुख दूर हो जाते हैं।
एकादशी का महत्व बताया
कथावाचक दीपकभाई शास्त्री ने श्रद्धालुओं को एकादशी का महत्व बताते हुए कहा कि इस दिन चावल का सेवन वर्जित रखना चाहिए तथा अक्षत का दान नहीं करना चाहिए। उन्होंने घर में एक घी और एक तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करने तथा श्री महालक्ष्मी नम: और नमो भगवते वासुदेवाय मंत्रों के जप का महत्व भी बताया।
शिवमय हुआ कथा पंडाल
कथा के दौरान श्रद्धालु नम: शिवाय, हर-हर भोले नम: शिवाय के जयघोष के साथ भक्ति रस में सराबोर रहे। भगवान शिव और माता सती के आदर्श चरित्र का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा कथा पंडाल शिवमय वातावरण से गूंज उठा।
आयोजन समिति व्यवस्थाओं में जुटी
श्री गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रमुख शैलेश पटेल, कार्यदर्शी सुनील लधड़ तथा महोत्सव चेयरमैन गिरीश उपाध्याय सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। कार्यदर्शी सुनील लधड़ ने बताया कि आगामी दिनों में शिव-पार्वती विवाह महोत्सव, शिव तांडव, गणपति प्राकट्य और ज्योतिर्लिंग महिमा जैसे दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। समापन अवसर पर यज्ञ, शिव सहस्रनामावली पाठ और महाप्रसाद का आयोजन होगा।