हुबली

रेलवे स्टेशन पर खोई मुस्कान फिर लौटी: बिछड़े बचपन को फिर मिला अपनों का आंगन, ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते ने चार वर्षों में 331 बच्चों को दी नई जिंदगी

रेलवे स्टेशन की भीड़ में कोई बच्चा घर का रास्ता भूल गया था, कोई नाराज होकर घर छोड़ आया था, तो कोई मानव तस्करों और शोषण के जाल में फंसने की आशंका के बीच भटक रहा था। ऐसे ही सैकड़ों मासूमों के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। हुब्बल्ली रेल मंडल में वर्ष 2023 से 2026 (अब तक) के दौरान इस अभियान के तहत 331 बच्चों को सुरक्षित बचाकर उनके परिवारों तक पहुंचाने और सामान्य जीवन में लौटाने का प्रयास किया गया। इन चार वर्षों में बचाए गए बच्चों में 266 लड़के और 65 लड़कियां शामिल हैं। वर्ष 2026 में अब तक 51 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।
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आरपीएफ ने संकट में फंसे बच्चों को सुरक्षित बचाकर परिजनों से मिलाया (एआइ फोटो)।
आरपीएफ ने संकट में फंसे बच्चों को सुरक्षित बचाकर परिजनों से मिलाया (एआइ फोटो)।

बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का मानवीय प्रयास
इन बच्चों को समय रहते संरक्षण मिलने से वे मानव तस्करी, बाल श्रम, शोषण और अन्य अपराधों की संभावित गिरफ्त में आने से बच गए। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते केवल एक रेस्क्यू अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का मानवीय प्रयास है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले, लापता, घर से भागे अथवा संदिग्ध परिस्थितियों में मिले बच्चों की पहचान कर आरपीएफ की टीमें उन्हें तत्काल सुरक्षा प्रदान करती हैं। इसके बाद सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। सीडब्ल्यूसी बच्चों की परिस्थितियों का आकलन कर उन्हें उनके माता-पिता या अभिभावकों से मिलाने की प्रक्रिया पूरी करती है।

संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने वाले बच्चों पर विशेष नजर
जिन बच्चों के परिवार तत्काल नहीं मिल पाते, उनके लिए सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। बचाए गए प्रत्येक बच्चे का पूरा विवरण ट्रैक चाइल्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाता है, जिससे उनकी पहचान और परिजनों तक पहुंचने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनती है। रेलवे स्टेशनों पर स्थापित चाइल्ड हेल्प डेस्क भी इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यहां तैनात कर्मी और आरपीएफ जवान संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने वाले बच्चों पर विशेष नजर रखते हैं। कई मामलों में यात्रियों की सूचना भी बच्चों को सुरक्षित बचाने में मददगार साबित हुई है।

सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका
रेल मंत्रालय के अधीन कार्यरत रेलवे सुरक्षा बल यात्रियों और रेलवे परिसरों की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते ने केवल बच्चों को बचाने का काम नहीं किया, बल्कि घर से भागने, लापता होने और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों के प्रति समाज में जागरूकता भी बढ़ाई है। लगातार विस्तारित हो रहा यह अभियान भारतीय रेलवे नेटवर्क को बच्चों के लिए और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Updated on:
26 Jul 2026 08:42 pm
Published on:
26 Jul 2026 08:36 pm
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