हुबली

शिव महापुराण कथा को विराम, भक्ति और भाव-विभोर श्रद्धालुओं के बीच हुई पूर्णाहुति

कर्नाटक के हुब्बल्ली शहर के देशपांडे नगर स्थित गुजरात भवन में गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव के सातवें दिन सोमवार को कथा की पूर्णाहुति एवं विराम समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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हुब्बल्ली के गुजरात भवन में आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव की पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण करते श्रद्धालु।
हुब्बल्ली के गुजरात भवन में आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव की पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण करते श्रद्धालु।

सद्गुरु की कृपा से ही मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक शांति
डोंगरेजी महाराज के शिष्य एवं प्रख्यात कथावाचक दीपकभाई शास्त्री ने अंतिम दिवस पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हुब्बल्ली के लोग अत्यंत भाग्यशाली हैं, जिन्हें शिव महापुराण कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु की कृपा से ही मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक शांति, नम्रता, अनुशासन और शरणागत भाव का विकास होता है। सद्गुरु का सान्निध्य अनेक जन्मों के पुण्यों से प्राप्त होता है और जो व्यक्ति सद्गुरु की शरण में पहुंच जाता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।

शिव महापुराण की सप्त संहिताओं के विविध प्रसंगों का दर्शन
उन्होंने कहा कि कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने का माध्यम है। सात दिनों में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण की सप्त संहिताओं के विविध प्रसंगों का दर्शन किया है। कथा का अंत नहीं होता, केवल उसमें विराम आता है। वास्तविक कथा तो तब शुरू होती है जब मनुष्य उसके संदेशों को अपने आचरण में उतारता है।

शिव महापुराण की सप्त संहिताओं के विविध प्रसंगों का दर्शन
उन्होंने कहा कि कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने का माध्यम है। सात दिनों में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण की सप्त संहिताओं के विविध प्रसंगों का दर्शन किया है। कथा का अंत नहीं होता, केवल उसमें विराम आता है। वास्तविक कथा तो तब शुरू होती है जब मनुष्य उसके संदेशों को अपने आचरण में उतारता है।

अपने हृदय में भगवान शिव को प्रकट करें
दीपकभाई शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा के दिव्य लोकों का वर्णन शास्त्रों में मिलता है, किंतु ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग भक्ति, समर्पण और सदाचार से होकर गुजरता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने हृदय में भगवान शिव को प्रकट करें और जीवन को मंगलमय बनाने का संकल्प लें।

शिव आराधना का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन दीपदान, नामस्मरण और शिव आराधना का विशेष महत्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान शिव के चरणों में अपने अहंकार, कर्म और प्राप्त उपलब्धियों को समर्पित करने का संदेश दिया। साथ ही कहा कि माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की कृपा से ही मनुष्य के भीतर विनम्रता और विवेक का विकास होता है।

प्रेम, समर्पण और श्रद्धा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
कथावाचक ने श्रद्धालुओं को रात्रि में भगवान शिव के नाम का जप करने तथा नियमित साधना से जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि प्रेम, समर्पण और श्रद्धा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। कथा के मध्य भजनों का सामूहिक गायन हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और शिव भजनों पर भाव-विभोर होकर सहभागिता की। पूरा कथा पंडाल नम: शिवाय के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

महायज्ञ और महाप्रसाद कल
गुजरात समाज के कार्यदर्शी सुनील लधड़ ने बताया कि 16 जून को सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक शिव सहस्रनामावली पाठ, दोपहर 12 बजे महायज्ञ तथा दोपहर 1 बजे महाप्रसाद के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा। महोत्सव को सफल बनाने में गुजरात समाज के प्रमुख शैलेश पटेल, कार्यदर्शी सुनील लधड़, महोत्सव चेयरमैन गिरीश उपाध्याय सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सक्रिय रूप से सेवाएं दे रहे हैं।

Published on:
15 Jun 2026 06:31 pm