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दीपकभाई शास्त्री ने कहा- प्रेम, समर्पण और भगवान शिव की भक्ति ही भवसागर से पार लगाने का मार्ग

कर्नाटक के हुब्बल्ली शहर के देशपांडे नगर स्थित श्री गुजरात भवन में गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के छठे दिन रविवार को भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। डोंगरेजी महाराज के शिष्य एवं प्रख्यात कथावाचक दीपकभाई शास्त्री ने ज्योतिर्लिंग प्राकट्य के दिव्य प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए भगवान शिव की अनंत महिमा का गुणगान किया। इस अवसर पर ज्योतिर्लिंग की विशेष झांकी सजाई गई, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान पूरा वातावरण नम: शिवाय के जयघोष और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा।

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हुब्बल्ली के श्री गुजरात भवन में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के छठे दिन रविवार को श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण करतीं श्रद्धालु महिलाएं।

हुब्बल्ली के श्री गुजरात भवन में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के छठे दिन रविवार को श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण करतीं श्रद्धालु महिलाएं।

प्रत्येक व्यक्ति को केवल प्रेम की आवश्यकता
कथावाचक दीपकभाई शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में प्रेम, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में हमारे निकट रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल प्रेम की आवश्यकता होती है। यदि मनुष्य प्रेम करना सीख जाए तो जीवन की अनेक समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं।

व्यवहार में मधुरता रखें
उन्होंने कहा कि भगवान की शरण में भावपूर्वक समर्पित होने वाला व्यक्ति जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त होकर भवसागर को पार कर सकता है। माता-पिता, गुरु और भगवान के प्रति श्रद्धा और प्रेम ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने व्यवहार में मधुरता रखें और प्रत्येक व्यक्ति से प्रेमपूर्ण संवाद करें।

भगवान का नाम स्मरण
दीपकभाई शास्त्री ने कहा कि प्रात:काल भगवान का नाम स्मरण करने से बुद्धि में चैतन्य का संचार होता है और संध्या के समय भजन-कीर्तन करने से दिनभर के पापों का क्षय होता है। उन्होंने कहा कि जब जीवन में कठिनाइयां आएं, तब भगवान शिव का स्मरण ही मनुष्य को आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।

गौसेवा का महत्व
कथा के दौरान उन्होंने गौसेवा का महत्व बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को महीने में कम से कम एक बार कुछ समय गौशाला में सेवा कार्य के लिए निकालना चाहिए। गौसेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अभिन्न अंग है, जो मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। उन्होंने तीर्थ स्थलों के दर्शन, शरीर और मन की पवित्रता तथा सात्विक जीवनशैली अपनाने पर भी बल दिया।

ज्योत से ज्योत प्रेम की गंगा…
कथा के मध्य श्रद्धालुओं ने ज्योत से ज्योत प्रेम की गंगा बहाते चलो… तथा जिसकी लागी लगन भगवान में, उसका दिया भी जले तूफान में… जैसे भजनों का सामूहिक गायन किया। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा।

15 जून को होगी पूर्णाहुति
गुजरात समाज के कार्यदर्शी सुनील लधड़ ने बताया कि 15 जून को सायं 3:30 बजे से 7 बजे तक कथा के साथ पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। वहीं 16 जून को सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक शिव सहस्रनामावली पाठ, दोपहर 12 बजे यज्ञ तथा दोपहर 1 बजे महाप्रसाद के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा। गुजरात समाज के प्रमुख शैलेश पटेल, कार्यदर्शी सुनील लधड़ तथा महोत्सव चेयरमैन गिरीश उपाध्याय सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।