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शिव तांडव और गणपति प्राकट्य प्रसंग से भक्तिरस में डूबा गुजरात भवन

कर्नाटक में हुब्बल्ली के देशपांडे नगर स्थित गुजरात भवन में गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के पांचवें दिन शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। डोंगरेजी महाराज के शिष्य एवं प्रख्यात कथावाचक दीपकभाई शास्त्री ने शिव तांडव एवं गणपति प्राकट्य के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और सदाचार का संदेश दिया। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्ति गीतों और भगवान शिव के जयघोष से गुंजायमान रहा।

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हुब्बल्ली के गुजरात भवन में आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव के पांचवें दिन भगवान शिव की आरती करते श्रद्धालु।

हुब्बल्ली के गुजरात भवन में आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव के पांचवें दिन भगवान शिव की आरती करते श्रद्धालु।

सच्ची भक्ति और समर्पण से ही ईश्वर की कृपा
कथावाचक दीपकभाई शास्त्री ने कहा कि गृहस्थ आश्रम केवल परिवार चलाने का माध्यम नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम और त्याग का केंद्र होना चाहिए। परिवार में शांति, विश्वास और आपसी सम्मान बना रहे, यही सच्चे जीवन की पहचान है। उन्होंने कहा कि बाहरी संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक आध्यात्मिक संपदा है। मनुष्य यदि अपने जीवन को भगवान के चरणों में समर्पित कर दे तो उसका जीवन सफल हो जाता है। उन्होंने माता सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति और समर्पण से ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वार्थ में लगा रहता है, लेकिन जो व्यक्ति परमार्थ और प्रेम का मार्ग अपनाता है, वही वास्तविक सुख प्राप्त करता है।

माता-पिता और गुरु का कभी अपमान नहीं करें
दीपकभाई शास्त्री ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता और गुरु का कभी अपमान नहीं करना चाहिए। जीवन में एक बार विश्वास टूट जाए तो उसे पुन: स्थापित करना अत्यंत कठिन होता है। उन्होंने अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से अर्जुन अजेय बने, उसी प्रकार भगवान का सच्चा स्मरण मनुष्य को हर कठिनाई से लडऩे की शक्ति देता है।

विपरीत परिस्थितियों में भी न हो कभी निराश
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जब जीवन में विपरीत परिस्थितियां आएं तो कभी निराश न हों। घर छोडऩे या आत्मघात जैसे विचारों को मन में स्थान न दें, बल्कि भगवान के नाम का स्मरण करें। जब समय प्रतिकूल हो, तब ईश्वर का नाम ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। अहंकार मनुष्य के पतन का कारण है, इसलिए जीवन से इगो को दूर कर विनम्रता को अपनाना चाहिए।

बताया गोदान का महत्व
कथा के दौरान उन्होंने गोदान के महत्व का भी वर्णन करते हुए कहा कि शास्त्रों में गोदान को वैतरणी नदी से मुक्ति का साधन बताया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को अनेक छोटे-छोटे धार्मिक और पारिवारिक जीवनोपयोगी उपाय भी बताए तथा कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए। भक्ति रस से सराबोर वातावरण में श्रद्धालुओं ने राधे-राधे जपो, चले आएंगे बिहारी… भजन का सामूहिक गायन किया, जिससे पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा।

आगामी कार्यक्रम
गुजरात समाज के कार्यदर्शी सुनील लधड़ ने बताया कि 14 जून को ज्योतिर्लिंग प्राकट्य का दिव्य प्रसंग सायं 3:30 बजे से 7 बजे तक सुनाया जाएगा। वहीं 16 जून को सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक शिव सहस्रनामावली पाठ, दोपहर 12 बजे यज्ञ तथा दोपहर 1 बजे महाप्रसाद के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा। गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में गुजरात समाज के प्रमुख शैलेश पटेल, कार्यदर्शी सुनील लधड़ तथा महोत्सव चेयरमैन गिरीश उपाध्याय सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।