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इस्कॉन राधा गोविंद देवजी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जून को, आम श्रद्धालुओं के लिए 10 अगस्त से खुलेगा

उत्तर कर्नाटक को एक नई आध्यात्मिक पहचान देने जा रहा इस्कॉन का भव्य राधा गोविंद देवजी मंदिर आगामी 10 अगस्त 2026 से आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। रायपुर (धारवाड़) में निर्मित यह विशाल मंदिर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। इस्कॉन हुब्बल्ली-धारवाड़ के अध्यक्ष राजीव लोचना दास तथा उपाध्यक्ष रघोत्तम दास ने शनिवार को मंदिर परिसर में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि भगवान राधा गोविंद देवजी की प्राण प्रतिष्ठा 22 जून 2026 को वैदिक एवं आगम शास्त्रों के अनुसार संपन्न होगी। इसके पूर्व 18 जून से विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक विधानों का आयोजन किया जाएगा।

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रायपुर (धारवाड़) में निर्माणाधीन इस्कॉन राधा गोविंद देवजी मंदिर के निर्माण की जानकारी देते इस्कॉन के पदाधिकारी।

रायपुर (धारवाड़) में निर्माणाधीन इस्कॉन राधा गोविंद देवजी मंदिर के निर्माण की जानकारी देते इस्कॉन के पदाधिकारी।

23 जून से 9 अगस्त तक 48 दिवसीय मंडल पूजा
प्राण प्रतिष्ठा के बाद 23 जून से 9 अगस्त तक 48 दिवसीय मंडल पूजा का आयोजन होगा। मंडल पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान नव-निर्मित मंदिर 18 जून से 9 अगस्त 2026 तक आम जनता के लिए बंद रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु वर्तमान इस्कॉन हुब्बल्ली-धारवाड़ मंदिर में दर्शन एवं पूजा कर सकेंगे। नए मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना तथा सार्वजनिक दर्शन 10 अगस्त से प्रारंभ होंगे। मंदिर परिसर वर्तमान में सड़क स्तर से लगभग 110 फीट ऊंचाई पर स्थित है। 90 फीट ऊंचे गोपुरम के निर्माण के बाद इसकी कुल ऊंचाई लगभग 200 फीट हो जाएगी, जिससे यह उत्तर कर्नाटक के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल हो जाएगा।

उत्तर भारतीय नागर और दक्षिण भारतीय द्रविड़ वास्तुकला का सुंदर समन्वय
चार मंजिला इस मंदिर का निर्माण में उत्तर भारतीय नागर और दक्षिण भारतीय द्रविड़ वास्तुकला का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। मंदिर के प्रथम चरण के निर्माण पर लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत आई है। दूसरे चरण के पूर्ण होने पर मंदिर परिसर का विस्तार लगभग 2 लाख वर्ग फीट तक हो जाएगा, जो आकार की दृष्टि से बेंगलूरु के प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर परिसर के समकक्ष माना जा रहा है।

राधा कुंड और श्यामा कुंड की आकर्षक प्रतिकृति
मंदिर परिसर में वैदिक शिक्षा कक्षाएं, विशाल पुस्तकालय, आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए व्याख्यान कक्ष, अन्नदान हॉल, सामुदायिक गतिविधियों के लिए बहुउद्देशीय सभागार, हस्तशिल्प एवं धार्मिक उपहार केंद्र सहित अनेक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा श्री राधा कुंड और श्री श्यामा कुंड की आकर्षक प्रतिकृति भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। मंदिर निर्माण की यात्रा वर्ष 2012 में शुरू हुई थी। 24 फरवरी 2013 को शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया तथा जुलाई 2013 में नींव निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।