
हुब्बल्ली में आयोजित त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम में महिला सुरक्षा, आत्मरक्षा और संस्कृति संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त करतीं मीनाक्षी सेहरावत।
महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने को लेकर हुआ आयोजन
कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक करना तथा सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना था। कार्यक्रम में श्री राम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक, हिमाचल प्रदेश की सनातन धर्म प्रवक्ता मीनाक्षी सेहरावत तथा हिंदू जनजागृति समिति की रणरागिणी महिला विंग की राज्य सह-संयोजक भावना गौड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
गूंजा जय शिवाजी, जय भवानी का उद्घोष
मंच पर पहुंचते ही मीनाक्षी सेहरावत ने जय शिवाजी, जय भवानी के उद्घोष के साथ अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने कहा कि परिवारों में बच्चों, विशेषकर बेटियों को भारतीय इतिहास, संस्कृति और सनातन परंपराओं की जानकारी देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल धर्म की चिंता करने के बजाय उसके मूल्यों का पालन करना अधिक महत्वपूर्ण है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि घर-परिवार में वीर-वीरांगनाओं की गाथाएं, भगवद्गीता तथा भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। उन्होंने रानी पद्मिनी, रानी लक्ष्मीबाई और रानी चेन्नम्मा जैसी ऐतिहासिक वीरांगनाओं का उल्लेख करते हुए महिलाओं में साहस और आत्मसम्मान की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
बेटियों को मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम बनाना आवश्यक
उन्होंने महिलाओं की आत्मरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में बेटियों को मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बेटियों को आत्मरक्षा के साधनों और सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूक करें तथा उनमें आत्मविश्वास का विकास करें। मीनाक्षी सेहरावत ने कहा कि चूडिय़ां महिलाओं की कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी शक्ति और संस्कृति का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को इतिहास, संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जोड़कर समाज को मजबूत बनाया जा सकता है।
उत्तर कर्नाटक के विभिन्न जिलों की भागीदारी रही
कार्यक्रम में हुब्बल्ली-धारवाड़ सहित उत्तर कर्नाटक के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। विभिन्न महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में एसएसके समाज महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष एवं दुर्गा सेना जिला अध्यक्ष पूर्णिमा काडम्मनवर, हिंदू महिला नेत्री यशोदा तांबे, दुर्गा सेना की प्रमुख रोहिणी बन्नूर, एसएसके समाज की महिला नेत्री नीता मेत्रानी, बसवराज दुर्गद, मंजू काटकर सहित अन्य पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
Published on:
14 Jun 2026 07:47 pm
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