हुबली

हुब्बल्ली का भवानीशंकर मंदिर: आस्था और चालुक्यकालीन विरासत का जीवंत प्रतीक, संकरी गलियों में बसी ऐतिहासिक धरोहर, जहां इतिहास, स्थापत्य और श्रद्धा का होता है संगम

हुब्बल्ली शहर के पुराने हिस्से में स्थित श्री भवानी शंकर मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व के कारण आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ओल्ड हुब्बल्ली की संकरी गलियों के बीच स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पहचान रखता है और चालुक्यकालीन वास्तुकला की अनूठी झलक प्रस्तुत करता है। इतिहास, आस्था और प्राचीन स्थापत्य का अद्भुत संगम यह मंदिर शहर की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए है और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

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प्राचीन शिल्पकला से सजा मंदिर का भव्य बाहरी दृश्य, शिखर पर विराजमान कलश इसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गरिमा को दर्शाता है।

मंदिर की वास्तुकला में चालुक्य शैली का प्रभाव
जानकारी के अनुसार मंदिर की मूल संरचना समय के साथ बदलते शहरी स्वरूप से प्रभावित हुई है। सड़क का स्तर बढऩे के कारण मंदिर वर्तमान में सड़क की सतह से नीचे दिखाई देता है। बताया जाता है कि पहले यहां प्रवेश के लिए सीढिय़ों वाला विस्तृत प्रांगण हुआ करता था, जो इसकी प्राचीन भव्यता का हिस्सा माना जाता है। मंदिर का निर्माण मुख्य रूप से बलुआ पत्थर से किया गया है। इसके स्तंभ, दीवारें, छत और फर्श प्राचीन निर्माण कला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। मंदिर की वास्तुकला में चालुक्य शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। विशेष रूप से स्तंभों की विशिष्ट बनावट और संरचना इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान प्रदान करती है। मंदिर के गर्भगृह में पूर्वाभिमुख श्री भवानी शंकर, जिन्हें भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है, विराजमान हैं। वहीं दक्षिण दिशा में स्थित गर्भगृह में भगवान नारायण की चार भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है, जिसमें शंख, चक्र और गदा जैसे धार्मिक प्रतीक अंकित हैं। प्रतिमा के समीप हनुमान की आकृति तथा शीर्ष भाग में कीर्तिमुख भी दर्शाया गया है।

नाग देवता से जुड़े धार्मिक प्रतीक भी मौजूद
मंदिर परिसर में सप्तमातृकाओं की प्रतिमाएं और नाग देवता से जुड़े धार्मिक प्रतीक भी मौजूद हैं, जो इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। मंदिर के शिखरों की विशेष बनावट भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करती है। शिखरों पर बने कीर्तिमुखों को परंपरागत रूप से बुरी शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर के समीप स्थित श्री दत्तात्रेय देवस्थान भी विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां के शिखर पर स्थित चक्र को लेकर लोगों में विशेष आस्था जुड़ी हुई है।

गहराई से जुड़ी है श्रद्धालुओं की आस्था
श्री भवानी शंकर एवं श्री नारायण देवस्थान ट्रस्ट हुब्बल्ली के अध्यक्ष संजीव जोशी ने बताया कि मंदिर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते रहते हैं। विशेष अवसरों के अलावा श्रावण मास के दौरान यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर परिसर में समय-समय पर पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई है।

Published on:
24 May 2026 09:17 pm
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