राजस्थान के जालोर जिले के चौरा में नवविवाहित दंपत्ति ने विवाह बंधन में बंधने के बाद पौधरोपण किया। इस दौरान नशामुक्त विवाह समारोह के साथ ही गौदान किया गया। कर्नाटक के हुब्बल्ली में निवास कर रहे राजस्थान मूल के लोग भी इस आयोजन में शामिल हुए और इस प्रेरक पहल की सराहना की।
नई पीढ़ी को प्रेरणा
दक्षिण भारतीय विश्नोई समाज हुब्बल्ली के अध्यक्ष एवं चौरा निवासी बीरबल विश्नोई ने बताया कि चौरा निवासी नरेश कुमार पुत्र सूजानाराम विश्नोई ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए अपने पुत्र-पुत्री की शादी में निकटवर्ती रामदेव वात्सल्य गौधाम चौरा में पौधरोपण करने के साथ ही गौदान किया। नवदंपत्ति जोड़े ने विवाह को यादगार बनाने के लिए गौशाला में पौधरोपण किया। इससे पर्यावरण संतुलित रहने के साथ ही अन्य नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिल सकेगी। सामाजिक सरोकार की इस पहल की सभी ने सराहना की। विवाह समारोह में नशे की मनुहार भी नहीं की गई। इस तरह समारोह को नशामुक्त रखा गया।
सराहनीय पहल
नवविवाहित दंपत्ति द्वारा विवाह के अवसर पर पौधरोपण, नशामुक्त समारोह और गौदान जैसे सामाजिक व पर्यावरणीय सरोकारों को महत्व देना एक सराहनीय पहल है। यह उदाहरण न केवल विवाह जैसे निजी अवसर को सामाजिक कल्याण से जोड़ता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को भी प्रोत्साहित करता है। कर्नाटक के हुब्बल्ली में रह रहे राजस्थान मूल के लोगों की इसमें भागीदारी और इस पहल की सराहना यह दर्शाती है कि सकारात्मक सोच और परंपरा को नया रूप देने की भावना सीमाओं से परे जाती है। इस तरह की पहल समाज में जागरूकता फैलाने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि इस पहल को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए, तो यह अन्य दंपत्तियों और परिवारों के लिए भी एक आदर्श बन सकती है। इस दौरान गौशाला संचालक जालाराम विश्नोई, नरेश साहू समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे।