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हम्पी से हुब्बल्ली तक: पर्यटन, परंपरा और विकास पर मंथन, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत का अभिनंदन

राजस्थान की सांस्कृतिक सुगंध और कर्नाटक की कर्मभूमि के संगम का साक्षी मंगलवार को हुब्बल्ली बना, जब राजस्थानी प्रवासी समाज की ओर से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत का अभिनंदन किया गया। गोकुल रोड स्थित नए बस स्टैंड के समीप दिवा इन्फ्रा में आयोजित इस समारोह में प्रवासी समाज की एकजुटता, राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक गौरव स्पष्ट रूप से झलका।

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हुब्बल्ली में प्रवासी समाज के अभिनंदन समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत।

हुब्बल्ली में प्रवासी समाज के अभिनंदन समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत।

शुरुआत भारत माता के जयकारों से
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के जयकारों से हुई। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने भी उपस्थित जनसमूह से राष्ट्रवाद और एकता के उद्घोष करवाए। इस अवसर पर विधायक महेश टेंगिनकाई सहित विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

हम्पी से वैश्विक पर्यटन की परिकल्पना
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत ने कर्नाटक की ऐतिहासिक धरोहर हम्पी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे हाल ही में दो दिवसीय प्रवास पर हम्पी पहुंचे थे। हम्पी केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की अमूल्य विरासत है। आने वाले समय में इसे भारत के प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक मंथन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने संस्कृति, इतिहास और आधुनिकता तीनों को सहेज कर रखा है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

राजस्थान से देशभर तक प्रवासियों की प्रेरक यात्रा
शेखावत ने राजस्थान के प्रवासी समाज की ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्थान के लोग 200-250 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर व्यापार, उद्योग और सेवा के माध्यम से विकास के केंद्र बने हैं। शुरुआत में शेखावाटी अंचल के लोग कोलकाता पहुंचे और वहां से देशभर में व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार हुआ। यही कारण है कि आज राजस्थान से जाने वाले हर व्यापारी को पूरे देश में सम्मानपूर्वक मारवाड़ी के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि बिरला से लेकर देश के अनेक बड़े औद्योगिक घराने इसी मिट्टी की देन हैं और भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में राजस्थानियों का योगदान ऐतिहासिक रहा है।

कर्नाटक में घुली राजस्थानी पहचान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजस्थान का प्रवासी समाज दूध में मिश्री की तरह जिस भी समाज में जाता है, वहां पूरी तरह घुल-मिल जाता है। कर्नाटक में रहने वाले प्रवासी आज धाराप्रवाह कन्नड़ बोलते हैं, स्थानीय संस्कृति को सम्मान देते हैं और चार-चार पीढिय़ों से यहां रहकर इस भूमि को अपनी कर्मभूमि बना चुके हैं।
इसके बावजूद उन्होंने अपनी जड़ें, बोली, भोजन और संस्कार नहीं छोड़े। आज भी यहां केर-सांगरी, बाजरे की रोटी और राजस्थानी परंपराएं जीवंत हैं।

सेवा और संस्कार प्रवासी समाज की पहचान
शेखावत ने कहा कि जहां-जहां भी राजस्थानी समाज गया, वहां धर्मशालाएं, विद्यालय, अस्पताल, मंदिर और समाज भवन बनाकर सेवा को संस्कार बनाया। किसी भी क्षेत्र में उन्होंने कभी अवरोध नहीं, बल्कि सहयोग और विकास की भावना के साथ कार्य किया।

राष्ट्रवादी विचारधारा और प्रवासियों की भूमिका
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसंघ से लेकर आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनने तक की इस यात्रा में प्रवासी समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। देश के हर बड़े शहर में लाखों प्रवासी रहते हैं, जिन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत किया। राम मंदिर निर्माण में जनसहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें उल्लेखनीय योगदान राजस्थान के समाजजनों का रहा।

प्रवासियों की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी
केंद्रीय मंत्री ने भावनात्मक स्वर में कहा कि कर्नाटक सहित कहीं भी प्रवासियों को यदि किसी प्रकार की कठिनाई आती है तो वे परिवार के सदस्य की तरह सदैव साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, आधी रात को भी जरूरत पड़ी तो मैं तैयार हूं।

2047 का विकसित भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूत हो रही है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प अब सपना नहीं, बल्कि साकार होती वास्तविकता है।

समारोह का उद्देश्य
राजस्थानी प्रवासी समाज हुब्बल्ली के वरिष्ठ सदस्य सुरेश सी. जैन सिवाना ने बताया कि इस अभिनंदन समारोह का उद्देश्य प्रवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को सशक्त रूप से प्रस्तुत करना था। केंद्रीय मंत्री के आगमन से समाजजनों में उत्साह और गौरव का वातावरण रहा। कार्यक्रम पारंपरिक राजस्थानी स्वागत, भावनात्मक उद्बोधन और राष्ट्रभक्ति के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। जहां राजस्थान की आत्मा और कर्नाटक की धरती एक साथ राष्ट्र निर्माण का संदेश देती नजर आई।

कई गणमान्य लोग थे उपस्थित
इस अवसर पर श्री जैन मरुधर संघ के अध्यक्ष जयंतीलाल परमार, ललित सी. जैन, सुरेश सी.जैन, भरत भंडारी सीए, पूरणकुमार नाहटा, मदन सी. जैन, तेजराज भंसाली, संतोष टी. भंसाली, गौतम सी. जैन, मोहनलाल जैन, प्रकाश बाफना, प्रकाश कोठारी, सोहन एच. तातेड़, महेन्द्र पालगोता, भंवरलाल सी.जैन, अशोक अमिनगड, दूदाराम चौधरी, ललित सी. चौधरी, अभिषेक मेहता, मुकेश जैन, प्रवीण एल. बागरेचा समेत प्रवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।