देश में वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के 15 माह बाद भी इसकी तकनीकी परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं।
विकास मिश्रा @ इंदौर. एक जुलाई 2017 से देश में वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के 15 माह बाद भी इसकी तकनीकी परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं। आम व्यापारी और उद्योगपतियों के साथ ही निर्यातकों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निर्यातकों को मिलने वाले रिफंड की व्यवस्था पुख्ता नहीं होने से सिर्फ मध्यप्रदेश के निर्यातकों के करीब 1000 करोड़ रुपए अटके हैं। इसमें से करीब 300 करोड़ केंद्र सरकार से और 700 करोड़ रुपए का रिफंड राज्य सरकार से मिलना है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्टस आर्गनाइजेशन (फिओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में निर्यातकों का करीब 25 हजार करोड़ रुपए का जीएसटी रिफंड अटका हुआ है। इंदौर रीजन में करीब 100 करोड़ रुपए अब तक रिफंड नहीं हो सके हैं। सरकार जुलाई से परेशानी को हल करने की बात कह रही है, लेकिन अभी भी हालात ठीक नहीं हुए हैं। इंदौर रीजन में सबसे अधिक प्रभाव पीथमपुर की औद्योगिक इकाइयों पर हुआ है। यहां की करीब 1500 इकाइयां बड़ी मात्रा में निर्यात करती हैं। स्पेशल इकॉनोमी जोन (सेज) में फार्मा की ५० बड़ी कंपनियां निर्यात करती हैं। इन सभी का रिफंड अटका हुआ है।
सरकारों की उदासीनता से बने ऐसे हालात
जीएसटी विशेषज्ञ सोमनाथ शिंदे का कहना है, 15 माह बाद भी जीएसटी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। निर्यातकों के रिफंड को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के नोडल विभाग की उदासीनता से यह हालात बन रहे हैं। सरकार ने सारी व्यवस्था ऑनलाइन करने की बात कही है, लेकिन कुछ काम अभी भी मैन्युअल हो रहे हैं, जिससे परेशानी आती है।
दिक्कतें नहीं हो पा रहीं कम
फियो के क्षेत्रीय निदेशक राजेश भाटिया ने बताया, निर्यातकों को जीएसटी रिफंड नहीं मिलने से उनकी वर्किंग कैपिटल फंस गई है, जिससे गत 11 माह में देशभर में उत्पादन 30 से 35 फीसदी तक गिरा है। मप्र के फार्मा, ऑटो कम्पोनेंट, सोयाबीन, आइटी, रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, एल्यूमिनियम और लेदर टॉयज कारोबार इससे खासा प्रभावित हुआ है। फियो के राष्ट्रीय अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता के मुताबिक अटके रिफंड की 25 हजार करोड़ रुपए की राशि में से लगभग 15000 करोड़ राज्यों के पास इनपुट टैक्स के्रडिट के रूप में फंसी हुई है। दस हजार करोड़ रुपए की राशि आइजीएसटी मद में अटकी है, जिसका निपटारा केंद्र सरकार को करना है। जीएसटी से कारोबारियों को आसानी तो हुई है, लेकिन निर्यातकों की दिक्कतें कम नहीं हो रही हैं।