Contaminated Water Case : भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से बीमार हुए लोगों में से एक तीन साल की बच्ची को शहर के संजीवनी क्लीनिक द्वारा एक्सपायरी दवा देने का गंभीर लापरवाही से जुड़ा मामला सामने आया है।
Contaminated Water Case : देश के सबसे स्वच्छ शहर से पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने हाहाकार मचा रखा है। हालात ये हैं कि, अबतक 10 लोग अपनी जान गवा चुके हैं, जबकि 150 से अधिक शहर के अस्पतालों में उल्टी-दस्त की समस्या से जूझते हुए जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। जबकि, क्षेत्र के 2700 घरों के 1200 से ज्यादा लोग पानी से फैले संक्रमण की चपेट में हैं। मरीजों में गंभीर हालत अधिकतर बुजुर्गों और बच्चों की है। अभी पीड़ितों पर से ये समस्या टली भी नहीं थी कि, इसी बीच शहर के एक संजीवनी क्लीनिक से बीमार बच्ची को एक्सपायरी डेट की दवा देने का मामला सामने आया है। इससे इलाके के लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि, भागीरथपुरा की रहने वाली एक तीन साल की बच्ची श्रृष्टि उल्टी-दस्त की समस्या से ग्रस्त होकर बीमार पड़ गई। परिजन उसे संजीवनी क्लीनिक लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने 5 दिन लगकर दवा खाने की सलाह दी। साथ ही, बच्ची को संबंधित दवा भी दी। लेकिन जब परिजन दवा लेकर घर पहुंचे और उन्होंने उसपर नजर डाली तो वो दंग रह गए। डॉक्टर ने उनकी बच्ची को जो दवा पांच दिन पीने की सलाह दी थी, वोतो उसी दिन एक्सपायर हो रही थी, जिस दिन उन्हें दी जा रही थी। यानी जिस दिन से उसे दवा दी जानी थी, उस दिन वो एक्सपायरी डेट की हो चुकी होती।
पहले से बच्ची समेत घर के अन्य सदस्यों की बीमारी से चिंतित श्रृष्टि के पिता उस एक्सपायरी डेट की दवा देखकर आग बबूला हो गए और संजीवनी क्लीनिक पहुंचकर जमकर हंगामा कर दिया। उन्होंने डॉक्टर और स्टाफ से सवाल किया- आखिर बीमार बच्चों को एक्सपायरी डेट के इतने करीब की दवा क्यों दी जा रही है? क्या ये लापरवाही नहीं है?
परिजन का कहना है कि, दूषित पानी से पहले ही पूरा इलाका बीमारियों की चपेट में है, ऊपर से क्लीनिक में ऐसी गलती बच्चों की जान को खतरे में डाल सकती है। देखते ही देखते हंगामा इतना बढ़ा कि, क्लीनिक के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। बताया जा रहा है कि, स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंलिस पहुंची तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।
आपको बता दें कि, शहर के भागीरथपुरा इलाके में बीते 10-12 दिन से स्थानीय लोग नल से आ रहे गंदे पानी की समस्या को लेकर नगर निगम से शिकायत कर रहे थे। लेकिन, इतने समय में निगम ने इसपर ध्यान नहीं दिया। जिसका नतीजा ये रहा कि एक-एक करके यहां के लोग बीमार पड़ने लगे। उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार की समस्या से जूझ रहे लोग अस्पताल पहुंचने लगे। आखिरकार यहां लोगों की मौतें होने लगीं। इसपर प्रशासन की नींद खुली तो उसने पानी की पड़ताल की, जिसपर उन्हें संदेह हुआ तो पाइपलाइन चेक कराई गई। पता लगा कि, क्षेत्र के बाहर स्थित एक सार्वजनिक सुलभ शौचालय के पास पाइपलाइन लीक थी, जिससे टॉयलेट का पानी नल के जरिए लोगों के घरों में जा रहा था।
लोग बीमार होते गए और अस्पताल पहुंचते गए। मौजूदा हालात ये हैं कि, अबतक 10 लोगों की जान जा चुकी है और 150 से ज्यादा लोग शहर के अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी की जद्दोजहद में जुटे हैं। जबकि, भागीरथपुरा के 2700 मकानों में रह रहे लोगों में से लगभग 1200 लोग दूषित पानी के दुष्परिणाम से प्रभावित हैं, स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें घर पर ही जरूरी उपचार दिया है। फिलहाल, संजीवनी क्लीनिकों में भी मरीजों की लंबी-लंबी कतारें हैं। ऐसे में दवाई की गुणवत्ता पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है।