बोले- अहिंसा की नगरी को अभी औ पुण्य अर्जन की आवश्यकता
इंदौर. पुंजापुरा से विहार के पहले आचार्यश्री विद्या सागर महाराज ने मंच से घोषणा की कि वे इंदौर नहीं सिद्धवरकूट जाएंगे। उन्होंने बड़ी संख्या में मौजूद श्रावकों को कहा कि 25 साल पहले संघ का सिद्धवरकूट जाना हुआ था। इस बार भी पावन क्षेत्र सिद्धवरकूट मिल रहा है। इंदौर को अभी ओर पुण्य अर्जन करने की आवश्यकता है।
आचार्यश्री ने मंच से कहा कि इंदौर निवासी और मुंबई के प्रवासी ने मुझसे कहा था कि यहां से रास्ता मुड रहा है। इस पर हमने कहा कि वह तो पक्का है। थोड़ा विचार विमर्श तो करना ही पड़ेगा। इंदौर वालों ने जो योजना बनाई है वह धीरे-धीरे कर रहे हैं। जो प्रारंभ हुए हैं उसमें ९ स्थान तैयार हो रहे हैं। मंगलाचरण हो रहा है। इंदौर वालों को और सोचना होगा। योजना काफी लंबी-चौड़ी है। भारत में इंदौर प्रसिद्ध नगरी है। महावीर भगवान और अहिंसा की नगरी अहिंसा की घोषणा करती रही है। ऐतिहासिक काम करने के लिए जनता ललायित है। जो कार्य करते हैं, उसमें पुण्य अर्जन करना होता है। इंदौर को पुण्य अर्जन की आवश्कयता है।