इंदौर

Indore news: कानूनी सलाह लेने आई थी यवुती, 4 बार होटल ले गया वकील, बाद में निकला 1 बच्चे का पापा

Highcourt news: उज्जैन के वकील पर गलत काम करने का आरोप है। हाईकोर्ट ने होटल रिकॉर्ड व अन्य सबूतों के आधार पर उसे अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
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Aug 25, 2026
वकील और महिला की प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
वकील और महिला की प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Indore news: शादी का झांसा देकर युवती से गलत काम करने के आरोपी वकील को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस गजेंद्र सिंह की कोर्ट ने आरोपी वकील के खिलाफ दर्ज केस में होटल रिकॉर्ड, बयान सहित अन्य सामग्री को देखते हुए यह आदेश दिए। कोर्ट ने कहा, अग्रिम जमानत असाधारण राहत है और इसे नियमित तरीके से नहीं दिया जा सकता। गंभीर मामलों में आरोपी को यह संरक्षण देने के लिए मजबूत आधार जरूरी है। बता दें कि मामला एमपी में उज्जैन के नानाखेड़ा थाना क्षेत्र का है। आरोपी जिला न्यायालय उज्जैन में प्रैक्टिस करता है।

आरोपी ने बनाया बहाना

पुलिस केस के मुताबिक युवती कानूनी सलाह के लिए उसके संपर्क में आई थी। आरोपी ने उससे शादी की इच्छा जताई और खुद को अविवाहित बताया। 7 सितंबर 2025 को आरोपी उसे देवास रोड स्थित होटल ले गया। आरोप है कि वहां गलत काम किया। इसके बाद लगातार ये जारी रहा। युवती ने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी ने बहाना बनाया। बाद में पता चला कि आरोपी शादीशुदा है और उसका एक साल का बच्चा है। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत की। सुनवाई के दौरान वकील ने आरोप लगाया कि युवती ब्लैकमेल कर रही है और पैसे के लिए शिकायत दर्ज कराई है। युवती की ओर से अग्रिम जमानत पर आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि खाराकुआं थाने में दर्ज एफआइआर में दोनों के संबंध,धमकी देने के आरोपों का उल्लेख है।

होटल रिकॉर्ड आया सामने

कोर्ट ने पुलिस जांच का रिकॉर्ड देखा जिसमें उल्लेख था कि होटल के मैनेजर ने बयान में बताया कि आरोपी युवती के साथ 7 सितंबर, 19 अक्टूबर, 2 नवंबर और 25 दिसंबर 2025 को होटल आया था। युवती के माता-पिता और दोस्तों के बयान में भी शादी के प्रस्ताव की जानकारी सामने आई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, अग्रिम जमानत देते समय जांच प्रभावित होने और साक्ष्य से छेड़खानी की आशंका पर अदालत को सतर्क रहना चाहिए।

पत्नी का आरोप- पति ने की मारपीट

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट में अजीब हालात बन गए। एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान पति-पत्नी के बीच का आपसी विवाद और एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआइआर सामने आने लगी। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने पूरी स्थिति देखने और बच्चों की मर्जी जानने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। याचिका इंदौर के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले एक पति ने लगाई थी। उसका आरोप था कि पत्नी उसके दो बच्चों को लेकर प्रेमी विजय पंचोली के साथ चली गई है और वर्तमान में मायके में रह रही है। बच्चों को उन्हें दिलाया जाए। कोर्ट ने नोटिस जारी कर पत्नी और बच्चों को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा। सोमवार को सुनवाई पत्नी और बच्चे पेश हुए। पत्नी ने पति के लगाए आरोप सिरे से खारिज कर दिए।

उसने कोर्ट को बताया कि पति मारपीट करता था जिसके चलते उसने पुलिस एफआइआर दर्ज कराई है। दूसरी तरफ, पति के वकील ने भी कोर्ट के समक्ष एक एफआइआर पेश में की, जिसमें आरोप था कि पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की वृद्ध मां के साथ मारपीट की थी। कोर्ट ने पत्नी और दोनों बच्चों से व्यक्तिगत तौर पर चर्चा की। उन्होंने पति के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि मामला पारिवारिक कलह और आपसी आपराधिक मुकदमों से जुड़ा है, जो बंदी प्रत्यक्षीकरण के दायरे में नहीं आता।

Updated on:
25 Aug 2026 01:24 pm
Published on:
25 Aug 2026 01:14 pm