इंदौर

भागीरथपुरा की गलियों में पसरा मातम, एंबुलेंस का सायरन सुनकर रहवासियों का कांप जाता है दिल

Bhagirathpura Case : भागीरथपुरा इलाके में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है। इलाके की 14 गलियों में हर तरफ आंसू और चीत्कार की आवाजें सुनाई दे रही हैं। अधिकारियों, नेता लगाताक आते जाते दिखाई दे रहे हैं।

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भागीरथपुरा की गलियों में पसरा मातम (Photo Source- Patrika)

Bhagirathpura Case : देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में टॉयलेट के दूषित पानी से मातम पसर गया है। क्योंकि, अबतक यहां 16 लोगों की जान जा चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि, इलाके के एंबुलेंस की आवाज सुनाई देते ही लोग खौफ से सिहर जाते हैं। उन्हें लगता है- शायद फिर कोई गंदे पानी की चपेट में आ गया।

देश के सबसे स्च्छ शहर के नाम से पहचान रखने वाले मध्य प्रदेश में स्थित इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है। इलाके की 14 गलियों में हर तरफ आंसू और चीत्कार की आवाजें सुनाई दे रही हैं। अधिकारियों, नेता लगाताक आते जाते दिखाई दे रहे हैं। मीडिया भी गली के हर नुक्कड़ पर का जमावड़ा है, लेकिन रहवासियों के चेहरे का पानी उतरा हुआ है। उनके चेहरे पर दहशत साफ नजर आ रही है। हालात ये हैं कि, एंबुलेंस का सायरन गूंजते ही लोग किसी अंजान आशंका के चलते घरों से बाहर निकलकर देखने लगते हैं।

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1400 लोग आए दूषित पानी की जद में

भागीरथपुरा की गलियों में पसरा मातम (Photo Source- Patrika)

स्थानीय लोगों को सबसे बड़ी ग्लानि ये सोचकर हो रही है कि, जिस पानी को वो अबतक नर्मदा जल मानकर वे अब तक सेवन कर रहे थे, निगम की लापरवाही के चलते उसमें मल-मूत्र मिल रहा था। नतीजा ये रहा कि, दूषित पानी पीने से अबतक 16 लोगों की जिंदगी लील चुका है, जबकि इलाके के 1400 लोग दूषित पानी की चपेट में आकर संक्रमित हुए हैं। इनमें से 200 से ज्यादा शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती भी हैं।

लोगों में शंका

चिंता की बात ये है कि, दो दर्जन से ज्यादा लोग अब भी आइसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। 50 हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले भागीरथपुरा में शायद ही कोई घर होगा, जिसमें रहने वाले इस बात को लेकर आशंकित न हों कि, वो जो पानी पी रहे हैं वह पीने लायक है भी या नहीं?

प्रशासनिक लापहरवाही ढांकने की कीमत 2 लाख

इस गंभीर लापरवाही की भेंट चढ़कर इलाके के जिन लोगों ने अपनों को खोया है, सरकार उन्हें क्षतिपूर्ति के रूप में दो-दो लाख की सहायता करने की घोषणा की है। इसे लेकर भी रहवासियों में आक्रोश है। लोगों की मानें तो शासन, प्रशासन इंसान की कीमत 2 लाख रुपये लगाकर अपनी लापरवाही को ढांकने का प्रयास कर रहा है। व्यवस्था में सुधार के बजाय जिम्मेदार बरगला रहे हैं। यहां लोगों का कहना है कि, इतना सब हो चुका लेकिन भागीरथपुरा के नलों में अब भी दूषित पानी ही आ रहा है।

किडनी तक पहुंचा संक्रमण

भागीरथपुरा में रहने वाले मोहनलाल काकहना है कि, 25 दिसंबर से रेसीडेंसी इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए। दूषित पानी की वजह से उल्टी-दस्त के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। बेटे सोहन का कहना है कि, पिता का संक्रमण किडनी तक पहुंच गया है। डाक्टरों का कहना है कि, बैक्टेरिया की वजह से ऐसा हुआ है। बकौल सोहन आज तक कोई जनप्रतिनिधि, अधिकारी उनके पिता की सुध लेने नहीं आया। वे जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर पिता का उपचार करा रहे हैं।

सालों से झेल रहे परेशानी

क्षेत्र के निवासी सचिन सोलंकी का कहना है कि हम सालों से गंदे पानी की समस्या झेल रहे हैं। कई बार शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब जब क्षेत्र में मौत का तांडव चल रहा है, सरकार दावा कर रही है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन ऐसा है नहीं। क्षेत्र में जो पानी बांटा जा रहा है वह अब भी दूषित है।

अब तक नहीं मिली सहायता

मां गोमती रावत को खो चुके राहुल की आंखों में आक्रोश के आंसू हैं। अव्यवस्था को कोसते हुए वे बताते हैं कि उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद मां का उपचार करवाया, लेकिन हम उन्हें बचा नहीं सके। मां की मौत के बाद नेताओं और अधिकारियों का आना-जाना जारी है। गुरुवार कैबिनेट मंत्री घर आए और आश्वासन दे गए थे कि जल्दी ही दो लाख रुपये का चेक भिजवाएंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। राहुल का कहना है कि सरकार व्यक्ति की जान की कीमत दो लाख रुपये लगा रही है। हम दो लाख रुपये देंगे तो क्या हमारा व्यक्ति वापस आ जाएगा।

जिम्मेदारों को कोस रहे लोग

भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण शुक्रवार को 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान अरबिंदो अस्पताल में जान चली गई। अंतिम संस्कार मालवा मिल मुक्तिधाम में किया गया। इस घटना के बाद से भागीरथपुरा में मातम छाया हुआ है। लगातार हो रही मौतों के कारण रहवासी जिम्मेदारों को कोस रहे हैं। एंबुलेंस के लगातार सायरन सुन सुनकर लोग दहशत में हैं। उनका कहना है कि, ये दहशत कोरोना काल के दिनों से कम नहीं है।

Published on:
03 Jan 2026 01:47 pm
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