Bhojshala ASI Survey Report: इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला विवाद की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। एएसआई की सीलबंद मानी जा रही रिपोर्ट पहले से ही सभी पक्षकारों के पास थी। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई हैं।
MP News: इंदौर हाईकोर्ट में सोमवार को विवादित भोजशाला मामले में हुई सुनवाई के दौरान ये तथ्य सामने आया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जिस रिपोर्ट (Bhojshala ASI Survey Report) को खोला जाना था, वो पहले से ही सभी पक्षकारों के पास मौजूद है। इस तथ्य के सामने आने के बाद कोर्ट ने सभी पक्षकारों से कहा कि अब तक दावे-आपत्ति क्यों नहीं लगाए? इसके लिए अब कोर्ट ने सभी को 15 दिनों का समय दिया है। 16 मार्च को मामले में सुनवाई होगी।
सोमवार को लगभग आधा घंटा मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में एएसआइ की ओर से पेश हुए वकील ने जैसे ही रिपोर्ट को लेकर बात कही। कोर्ट ने उन्हें टोकते हुए कहा कि, ये रिपोर्ट आपके पास कैसे आई? ये तो सील पैक रिपोर्ट है, जिसे कोर्ट में खोला जाना है। इस पर वकील ने बताया, हाईकोर्ट ने दो साल पूर्व आदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने ये रिपोर्ट सभी पक्षकारों को सौंपने को कहा था। कोर्ट आदेश पढ़कर सुनाया।
कोर्ट ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के सामने ये तथ्य क्यों नहीं रखा? सरकार का पक्ष रखने पेश हुए महाधिवक्ता (एजी) प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी। कोर्ट ने सवाल किया कि दो साल पहले से रिपोर्ट सबके पास थी तो उस पर अब तक कोई दावे-आपत्ति किसी पक्षकार ने क्यों नहीं लिए? इसे क्या समझा जाए। इस पर वकीलों ने बताया, चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था, इसलिए आगे नहीं बढ़ पाया। इस पर कोर्ट ने सभी को दावे-आपत्तियां, सुझाव पेश करने को 15 दिन का समय दे दिया।
11 मार्च 2024 को एएसआइ को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। 98 दिन चले सर्वे में एएसआइ ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। 4 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई, जिसमें ये बातें सामने आई कि…
सुनवाई के दौरान एएसआइ की ओर से पेश वकील ने अपनी रिपोर्ट के बारे में बताया कि वो काफी बड़ी है। लगभग 2100 पन्नों की रिपोर्ट 9 वॉल्यूम में है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एएसआइ को निर्देश दिए कि वे इस रिपोर्ट को उन सभी पक्षकारों को जिन्हें ये उपलब्ध नहीं हुई, उन्हें उपलब्ध करा दें।
चूंकि ये रिपोर्ट अभी तक हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में नहीं दिख रही थी। जिस पर कोर्ट ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को आदेश जारी किए कि वे इस रिपोर्ट को सभी केसों के रिकॉर्ड के साथ शामिल करते हुए प्रदर्शित करें। (MP News)