इंदौर

भोजशाला विवाद: सर्वे रिपोर्ट में मंदिर के मिले सबूत, कोर्ट में पेश होने से पहले रिपोर्ट हुई लीक

Bhojshala ASI Survey Report: इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला विवाद की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। एएसआई की सीलबंद मानी जा रही रिपोर्ट पहले से ही सभी पक्षकारों के पास थी। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई हैं।

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Feb 24, 2026
Evidence of a temple found in bhojshala asi survey report (फोटो- Patrika.com)

MP News: इंदौर हाईकोर्ट में सोमवार को विवादित भोजशाला मामले में हुई सुनवाई के दौरान ये तथ्य सामने आया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जिस रिपोर्ट (Bhojshala ASI Survey Report) को खोला जाना था, वो पहले से ही सभी पक्षकारों के पास मौजूद है। इस तथ्य के सामने आने के बाद कोर्ट ने सभी पक्षकारों से कहा कि अब तक दावे-आपत्ति क्यों नहीं लगाए? इसके लिए अब कोर्ट ने सभी को 15 दिनों का समय दिया है। 16 मार्च को मामले में सुनवाई होगी।

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पक्षकारों के पास पहले से पहुंच गई रिपोर्ट, कोर्ट नाराज

सोमवार को लगभग आधा घंटा मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में एएसआइ की ओर से पेश हुए वकील ने जैसे ही रिपोर्ट को लेकर बात कही। कोर्ट ने उन्हें टोकते हुए कहा कि, ये रिपोर्ट आपके पास कैसे आई? ये तो सील पैक रिपोर्ट है, जिसे कोर्ट में खोला जाना है। इस पर वकील ने बताया, हाईकोर्ट ने दो साल पूर्व आदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने ये रिपोर्ट सभी पक्षकारों को सौंपने को कहा था। कोर्ट आदेश पढ़कर सुनाया।

कोर्ट ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के सामने ये तथ्य क्यों नहीं रखा? सरकार का पक्ष रखने पेश हुए महाधिवक्ता (एजी) प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी। कोर्ट ने सवाल किया कि दो साल पहले से रिपोर्ट सबके पास थी तो उस पर अब तक कोई दावे-आपत्ति किसी पक्षकार ने क्यों नहीं लिए? इसे क्या समझा जाए। इस पर वकीलों ने बताया, चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था, इसलिए आगे नहीं बढ़ पाया। इस पर कोर्ट ने सभी को दावे-आपत्तियां, सुझाव पेश करने को 15 दिन का समय दे दिया।

एएसआइ की रिपोर्ट में मंदिर के मिले हैं सबूत

11 मार्च 2024 को एएसआइ को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। 98 दिन चले सर्वे में एएसआइ ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। 4 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई, जिसमें ये बातें सामने आई कि…

  • सर्वे में पाए गए स्तंभों, स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है ये स्तंभ पहले मंदिर का हिस्सा थे, बाद में मस्जिद के स्तंभ बनाते समय उनका पुन: उपयोग किया गया था।
  • मौजूदा संरचना में चारों दिशाओं में खड़े 106 और आड़े 82 कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इनकी वास्तुकला से इस बात की पुष्टि होती है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिरों का ही हिस्सा थे। उन्हें वर्तमान संरचना के लिए पुनर्उपयोग में लाने को उन पर उकेरी देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को विकृत कर दिया गया। मानव और जानवरों की कई आकृतियां, जिन्हें मस्जिदों में रखने की अनुमति नहीं है, उन्हें छैनी जैसी किसी वस्तु का इस्तेमाल कर बिगाड़ा गया था।
  • एएसआइ की रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि मौजूदा संरचना में संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे कई शिलालेख मिले, जो भोजशाला के ऐतिहासिक, साहित्यिक और शैक्षिक महत्व को उजागर करते हैं।
  • एएसआइ टीम को सर्वे में एक ऐसा शिलालेख मिला, जिस पर परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। नरवर्मन ने 1094-1133 ईस्वी के बीच शासन किया था। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि पश्चिम क्षेत्र में लगाए गए कई स्तंभों पर उकेरे 'कीर्तिमुख, मानव, पशु और मिश्रित चेहरों वाली सजावटी सामग्री को नष्ट नहीं किया गया था।
  • दीवारों में खिड़की की फ्रेम पर उकेरी गई छोटी-छोटी देवताओं की आकृतियां मिली हैं, जिनकी हालत अन्य आर्टिकल के मुकाबले बहुत अच्छी है।
  • भोजशाला परिसर के सर्वे के दौरान 94 ऐसी मूर्तियां मिलीं, जिन पर महीन नक्काशी है। इसके अलावा कई ऐसे आर्टिकल भी मिले, जो भोजशाला के मंदिर होने की ओर इशारा कर रहे हैं।
  • ये कलाकृतियां संगमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से तैयार की गईं थीं।
  • उकेरी गईं छवियों में गणेश, ब्रह्मा उनकी पत्नियों के साथ, नृसिंह, भैरव, देवी-देवता, मानव और पशु आकृतियां शामिल थीं। जानवरों की छवियों में शेर, हाथी, घोड़ा, कुत्ता, बंदर, सांप, कछुआ, हंस और पक्षी शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के कीर्तिमुख, मानव चेहरा, सिंह चेहरा, मिश्रित चेहरा भी हैं।
  • यहां 30 सिक्के भी मिले हैं। ये सिक्के चांदी, तांबा और अन्य धातुओं से निर्मित हैं और परमारकालीन हैं।
  • भोजशाला परिसर की खुदाई में जमीन में बहुमंजिला संरचना होने के पुख्ता प्रमाण सामने आए हैं।
  • दो स्तंभ ऐसे भी मिले, जिन पर ऊ सरस्वतयै नम: लिखा है। इसके अलावा भोजशाला को राजा भोज द्वारा बनाए जाने के प्रमाण भी सामने आए हैं।

काफी बड़ी है रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान एएसआइ की ओर से पेश वकील ने अपनी रिपोर्ट के बारे में बताया कि वो काफी बड़ी है। लगभग 2100 पन्नों की रिपोर्ट 9 वॉल्यूम में है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एएसआइ को निर्देश दिए कि वे इस रिपोर्ट को उन सभी पक्षकारों को जिन्हें ये उपलब्ध नहीं हुई, उन्हें उपलब्ध करा दें।

रजिस्ट्री जारी करें रिपोर्ट

चूंकि ये रिपोर्ट अभी तक हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में नहीं दिख रही थी। जिस पर कोर्ट ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को आदेश जारी किए कि वे इस रिपोर्ट को सभी केसों के रिकॉर्ड के साथ शामिल करते हुए प्रदर्शित करें। (MP News)

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Published on:
24 Feb 2026 12:28 am
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