
इंदौरः एक तरफ जहां देश में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को लेकर पश्चिम बंगाल से लेकर पूरे देश की राजनीति गर्माई हुई है। जिसमें असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे पर 40 लाख लोगों को नहीं शामिल किए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साध रही हैं। इसी को लेकर भाजपा की तरफ से भी पलटवार सामने आने लगा है। इसी के चलते भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि, एक समय था जब अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर वह ही सबसे ज्यादा सख्त रवय्या अपनाएं हुए थी, लेकिन आज वह अपना ही रुख बदल बैठी हैं और लोगों को बांटने के लिए एनआरसी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं, इसके पीछे उनकी लालसा है कि, वह प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा कर सकें।’’
खुद की बातों से पल गईं ममताः कैलाश
कैलाश ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख पर एनआरसी को लेकर वोट-बैंक की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। मीडिया बातचीत के दौरान बीजेपी महासचिव व पश्चिम बंगाल के प्रभारी विजयवर्गीय ने कोलकाता में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि,‘यह शर्मनाक है कि एक मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए लोगों को बांटने की कोशिश कर रही हैं।’विजयवर्गीय ने कहा कि,‘हमें आश्चर्य है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि टीएमसी ने 13 सालों में अपना रुख बदल लिया। टीएमसी को इसका जवाब देना होगा।’ विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि, ‘सीएम बनर्जी एनआरसी के विरोध में समर्थन मांगने के लिए दिल्ली गई थीं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने उन्हें समर्थन नहीं दिया। इसी को देश के लोगों की भावना से जोड़ते हुए वह जनता को बरगलाने का प्रयास कर रही हैं।’
पहले यह था ममता का नज़रिया
आपको बता दें कि, असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे पर 40 लाख लोगों को नहीं शामिल किए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर हमलार रवय्या बनाए हुए हैं। वही, कुछ साल पहले ममता बनर्जी का रुख बांग्लादेशी प्रवासियों को लेकर इसके बिल्कुल उलट था। ममता बनर्जी ने साल 2005 में लोकसभा में कहा था कि बंगाल में घुसपैठ एक आपदा बन चुके हैं। उन्होंने कहा था कि बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदान सूची में शामिल हैं। उस समय विपक्ष में रहीं ममता बनर्जी उस समय इस 'गंभीर मुद्दे' पर चर्चा की मांग की थी। इसके साथ ही उनके पास बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों से जुड़े हुए दो सेट के पेपर भी थे। हालांकि, तब लोकसभा स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल द्वारा बहस से इंकार करने के बाद ममता बनर्जी ने संसद के वेल में जाकर अध्यक्ष पर पेपर फेंक दिए थे। थे।