इंदौर

बसों पर नहीं  भाजपा का  ‘बस’ … अब कारों पर जोर

महाकुंभ में जाने के लिए बनाई नई रणनीति, आज दोपहर में बुलाई कोर कमेटी की दोबारा बैठक

2 min read
Sep 23, 2018
bjp
बसों पर नहीं  भाजपा का  'बस' ... अब कारों पर जोर

इंदौर। 25 सितंबर को भोपाल में भाजपा का महाकुंभ होने जा रहा है, जिसमें 10 लाख लोगों के इकट्ठा होने का दावा किया जा रहा है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता को लेकर जाने के लिए इंदौर भाजपा ने बसों की मांग की। सच ये है कि बस पर पार्टी का 'बस' नहीं चल रहा है, जिसके चलते अब कारों पर जोर देने का कहा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव का आगाज होने से पहले भाजपा अपनी शक्ति दिखाने जा रही है। २५ सितंबर को भोपाल में कार्यकर्ताओं का महाकुंभ रखा गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आ रहे हैं। पार्टी का दावा है कि कुंभ में दस लाख की भीड़ जुटेगी। इसके लिए हर जिले पर संख्या लाने का दबाव है।

इंदौर भाजपा ने संख्या ले जाने पर हामी भर दी और उसके लिए हर वार्ड में दस बसें देने की बात भी कह दी। करीब एक हजार बसें मांगी हैं, लेकिन प्रदेश सरकार व संगठन वह देने की स्थिति में नहीं है। पर्दे के पीछे की कहानी ये है कि पूरे प्रदेश के कार्यकर्ता भोपाल पहुंचेंगे। इसके लिए सभी जगह बसों की मांग हो रही है। इसके चलते पार्टी ने भोपाल व आसपास के जिलों में मांग के अनुसार बसें लगाने का फैसला किया।

वहीं, तय हुआ कि अन्य जिलों में थोड़ी कम दी जाएंगी। ऐसी स्थिति में इंदौर के हाथ में भी मांग के अनुसार बहुत कम बसें आएंगी। पार्टी का मानना है कि शहर की भाजपा के नेता व कार्यकर्ता सक्षम हैं, वे अपने वाहनों से पहुंच सकते हैं। बसों पर बस नहीं चलने पर अब पूरा फोकस निजी वाहनों पर कर दिया गया। अब रणनीति बनाई है कि हर पार्षद को अपने वार्ड से कारों का काफिला ले जाने का कहा जाएगा।

बसें आईं तो उसे वार्ड के साथ मोर्चा प्रकोष्ठों में समान वितरण किया जाएगा। आज दोपहर बुलाई बैठक-दो दिन पहले भी पार्टी ने महाकुंभ को लेकर बैठक बुलाई थी, लेकिन रणनीति में बदलाव की वजह से आज दोपहर में भी विधायक व नगर पदाधिकारियों को बुलाया गया। उससे पहले संभागीय संगठन मंत्री जयपालसिंह चावड़ा व नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा मोर्चा प्रकोष्ठों की बैठक लेंगे।

नहीं पहुंच पाती हैं बसें
प्रधानमंत्री मोदी की प्रदेश में कोई भी सभा हो तो इंदौर से कार्यकर्ताओं की भीड़ बसों से रवाना होती है। चौंकाने वाली बात ये है कि अधिकांश आयोजनों में कार्यकर्ता आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच पाते हैं। पहुंचने से पहले ही जाम लग जाता है।

सच ये भी है कि इंदौर से बसें समय पर रवाना नहीं हो पाती हैं और लेट होने की वजह से फजीहत का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से चार पहिया वाहनों को लेकर जाने को कहा जा रहा है, जिससे कार्यकर्ता समय पर इंदौर छोड़ दें।

Published on:
23 Sept 2018 11:03 am