इंदौर

Cancer Survivor Day: 11 साल से स्कॉर्फ बांधकर रहती हूं, कैंसर के बाद जीत ली 2 मैराथन

कैंसर को हराकर दूसरों को दे रहीं हौसला, बीमारी के बाद बदले जिंदगी के मायने

2 min read
Jun 04, 2023
Cancer Survivor Day

इंदौर। कैंसर का मतलब जिंदगी खत्म होना नहीं है। सही इलाज के साथ खुद पर विश्वास और हिम्मत से कैंसर पर जीत पाई जा सकती है। ज्यादातर लोग आज भी कैंसर का नाम सुनते ही सहम जाते हैं और कैंसर को जिंदगी का अंत मानकर मायूस हो जाते हैं। कैंसर के प्रति डर ही इंसान को मन ही मन मार देता है, जबकि ऐसा नहीं है। आज कुछ ऐसे बहादुरों से मिलते हैं, जिन्होंने कैंसर को हराया और आज जिंदगी पहले से बेहतर तरीके से जी रहे हैं।

हर दिन को नए अंदाज में जीने के साथ-साथ दूसरों के लिए ये प्रेरणा भी बन रहे हैं। हम शहर की ऐसी ही कैंसर सर्वाइवर की कहानियां लेकर आए हैं, जिन्होंने हार नहीं मानी और कैंसर का सही तरीके से इलाज कराने के बाद जिंदगी का महत्व समझा। इनका जुदा अंदाज छोटी-छोटी समस्याओं से परेशान होने वालों के लिए भी मिसाल है। आप भी इनसे सीखें कि किसी भी परेशानी में हार नहीं मानें। यह विश्वास रखें कि जिंदगी अभी बाकी है।

11 साल से स्कॉर्फ बांधकर रहती हूं, लेकिन छुपती नहीं- मधुरा भाले, गृहिणी

मुझे साल 2011 में कैंसर डिटेक्ट हुआ। एक दिन मेरा लेफ्ट हैंड दर्द कर रहा था। डॉक्टर ने मेमोग्राफी कराई। अगले दिन रिपोर्ट आई तो पता चला ब्रेस्ट कैंसर है। तब मेरी उम्र 38 साल थी और 7 साल का बेटा व 15 साल की बेटी थी। मन में डर तो था, लेकिन हिम्मत करके आगे बढ़ी और अगले ही दिन मेरा ऑपरेशन हुआ। मेरा एक ब्रेस्ट रिमूव कर दिया गया। फिर 6 कीमो हुई और तब अहसास हुआ कि जीवन कितना महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद साल मैं पांच मैराथन भी दौड़ चुकी हूं, जो 10 और 21 किमी की थी। मेरे बाल अब तक नहीं आए। मैं स्कॉर्फ बांधकर रखती हूं लेकिन जिंदगी को बेहतर अंदाज में ही जीती हूं और अन्य कैंसर पीड़ितों की मदद करती हूं।

मैसेज

कैंसर से डरने की जरुरत नहीं है और न ही अपनी बीमारी को छुपाने की आवश्यकता है। कैंसर के बाद भी जीवन सामान्य हो जाता है। केवल जरूरत है डाइट, एक्सरसाइज और हिम्मत की। हिम्मत न हारें।

भगवान ने दूसरा जन्म दिया, अब हर इच्छा पूरी कर रही हूं- अल्पना नारायणे, प्रोडक्ट आर्किटेक्ट

मेरा कैंसर से सामना साल 2012 में हुआ। तब मेरी सास को कैंसर हुआ था। समझ आया कि एक्स्ट्रा इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है। जनवरी 2021 में मुझे कैंसर के ट्यूमर का पता चला। मेरी बेटी 10वीं में थी। सबसे पहले उसी का ख्याल आया। अन्य सर्वाइवर की स्टोरी और माता-पिता, पिता और बेटी ने हिम्मत बंधाई। चार दिन बाद ही सर्जरी हो गई और 6 कीमो हुई। कोविड की दूसरी लहर में कोविड हो गया था। भगवान ने ये मुझे दूसरा जन्म दिया तो अब मैं मेरे सभी शौक पूरे करती हूं और हर चीज को नए नजरिए से देखती हूं। गिटार सीखने जाती हूं और वर्किंग भी हूं। कैंसर पीड़ितों के लिए संगिनी से जुड़कर काउंसलिंग कर रही हूं।

मैसेज

जीने की उम्मीद हमेशा अपने अंदर रखनी चाहिए, चाहे जीवन में कितनी ही बड़ी बीमारी का सामना करना पड़े। क्योंकि, हो सकता है कि जीवन उसके बाद और भी खूबसूरत हो जाए। हौसला न हारें।

Published on:
04 Jun 2023 01:43 pm
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