मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक खबर का हवाला देते हुए लिखा कि, कैलाश विजयवर्गीय पर रेप का केस.. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, जांच जारी रहेगी।
लड़कियों के पहनावे पर बयान देने के बाद विवादों में आए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे रेप के एक मामले का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक खबर का हवाला देते हुए लिखा कि, कैलाश विजयवर्गीय पर रेप का केस.. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, जांच जारी रहेगी। ट्वीट में महिला द्वारा लगाए गए रेप के आरोप का जिक्र करते हुए शिवराज सरकार के सामने सवाल खड़े किए हैं।
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने खबर के हवाले से आरोप लगाते हुए ट्वीट किया कि, 'कैलाश विजयवर्गीय पर रेप का केस, सुप्रीम कोर्ट ने कहा जांच जारी रहेगी। महिला का आरोप- कैलाश विजयवर्गीय ने अपने फ्लैट में बलात्कार किया और फिर वहां से जाने को मजबूर किया गया। लगभग 39 बार शारीरिक शोषण किया गया।' इसी के साथ कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आगे सवाल किया कि, 'शिवराज जी,
लाड़ली बहना कैसे बचेगी।'
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष का आरोप
इस मामले पर युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पिंटू जोशी का आरोप है कि, विजयवर्गीय एक मामले में बंगाल से फरार हैं। वो यहां नामजद रेप के मामले में आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट से बार-बार जाकर रियायत मांगते हैं। कैलाश विजयवर्गीय पहले भी अपनी बदतमीजी के लिए जाने गए हैं। पिंटू जोशी ने कहा कि, जो खुद महिला उत्पीड़न मामले में नामजद आरोपी हो उस आदमी के मुंह से अगर महिलाओं के सम्मान या महिलाओं को सीख देने की बात की जाती तो बेईमानी है। जिसके घर में बेटिया ना हो वो कैसे दूसरे की बेटियों का सम्मान करेगा। उनके खुद के दो बेटे हैं। अगर घर में बेटी होती तो उनको पता होता कि, बेटी के लिए ही टिप्पणी करना कितना बुरा और पाप माना जाता।
महिला का आरोप
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन महिला द्वारा लगाए गए आरोप के आधार पर दर्ज प्रकरण की बात करें तो शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि, कैलाश विजयवर्गीय ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया था। यहां उसके साथ बलात्कार किया गया। इसके बाद उसे वहां से जाने के लिए मजबूर किया गया। यही नहीं, महिला ने उसके साथ लगभग 39 बार शारीरिक शोषण का आरोप भी लगाया है।
उच्च न्यायालय के आदेश पर FIR
इस प्रकरण को लेकर महिला ने 20 दिसंबर, 2019 को आपीसी की धारा 341/506(2)/34 और धारा 341/323/325/506/34 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने का आवेदन दिया था, जिस पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद पीड़िता ने 12 नवंबर, 2020 को आईपीसी की धारा 156(3) के अंतर्गत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अलीपुर के समक्ष आवेदन दायर किया, जिसे भी खारिज कर दिया गया। पीड़ित महिला ने आपराधिक पुनर्विचार आवेदन के अंतर्गत उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण में अलीपुर न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए आपराधिक पुनर्विचार आवेदन पर अनुमति दे दी। अक्टूबर 2021 में उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप अलीपुर स्थानीय न्यायालय ने महिला की शिकायत को एफआईआर के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।