इंदौर

इस शहर ने बनाया खुद का होम आइसोलेशन सिस्टम, 24 घंटे की जा सकती है मरीजों निगरानी

इंदौर देश का ऐसा पहला शहर बना है, जिसने होम आइसोलेशन का एक हाईटेक पैटर्न बनाया है, जिससे सफलतापूर्वक मरीजों का घर पर इलाज किया जा सकता है।

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इस शहर ने बनाया खुद का होम आइसोलेशन सिस्टम, 24 घंटे की जा सकती है मरीजों निगरानी

इंदौर/ मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कोरोना वायरस लगातार अपने पाव पसार रहा है। एक तरफ जहां शहर में संक्रमण तेजी से फैल रहा है वहीं, दूसरी तरफ इंदौर देश का ऐसा पहला शहर बना है, जिसने होम आइसोलेशन का एक हाईटेक पैटर्न बनाया है, जिससे सफलतापूर्वक मरीजों का घर पर इलाज किया जा सकता है। इस सफलता का श्रेय इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह को जाता है।


व्यवस्थाएं सुचारू रखने में मिली मदद

ये बात तो सभी जानते हैं कि, मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर इंदौर ही है। ऐसी स्थिति में शहर के अस्पतालों में पर्याप्त इलाज दे पाना बड़ी चुनौती बना हुआ था। इससे निपटने के लिए जिले के संक्रमित मरीजों को घर में रखकर इलाज की जो व्यवस्था की गई है, उससे काफी सहयोगात्मक है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आने लगे हैं। साथ ही, अत्याधुनिक सुविधा से युक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम में एप के माध्यम से सतत निगरानी की जा रही है और मरीजों को परामर्श तथा आवश्यकता के अनुसार उपचार और अन्य मदद मुहैया कराई जा रही है।


होम आइसोलेशन एप करता है मरीजों की मदद

इंदौर नगर निगम की 311 एप में होम आइसोलेशन का फीचर जोड़ा गया है। इसकी मदद से कोविड-19 संक्रमण के प्रीसिम्पटोमैटिक (जिनमें लक्षण सामने नहीं आए हैं) मामलों को निर्धारित मापदंडो के अनुसार होम आइसोलेशन में भेजकर उनपर निगरानी रखी जाती है। होम आइसोलेट किए गए मरीज को रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा मेडिसिन किट और एक पल्स ऑक्सीमीटर दिया जाता है। मेडिसिन किट में एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयां होती हैं। पल्स ऑक्सीमीटर द्वारा ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट को मापा जाता है।

पहले एप में पंजीकरण करना होता है

दरअसल, प्रशासन ने एक होम आइसोलेशन के लिए एक पूरी व्यवस्था का इजाद किया है। किसी भी मरीज को होम आइसोलेशन की शुरुआत करने से पहले इंदौर की एक लोकल एप में पंजीकरण करना होता है। इसमें मरीज को एक स्व घोषणा पत्र भरना होता है, जिसके माध्यम से मरीज की फोटो और मेडिकल जानकारी एप पर अपलोड की जाती है।


वीडियो कॉल के जरिये मरीज एप पर देता है डॉक्टर को जानकारी

आइसोलेट किए गए व्यक्ति द्वारा एप के माध्यम से ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट को हर चार घंटे के भीतर मापा जाता है। जैसे ही कोई मरीज आंकड़े फीड करता है, वो एसजीआईटीएस कॉलेज स्थित कंट्रोल रूम में लगे मॉनिटर पर प्रदर्शित हो जाते हैं। अगर मरीज द्वारा डाटा फीड नहीं किया जाता तो कंट्रोल रूम से फोन कर मरीज से मौजूदा जानकारी मांगी जाती है। अगर किसी मरीज के आंकड़े गड़बड़ लगते हैं तो कंट्रोल रूम के डॉक्टर उससे वीडियो कॉल पर जानकारी लेते हैं। कंट्रोल रूम में चार डॉक्टर उपस्थित है, जिनका काम आइसोलेट मरीजों पर 24 घंटे निगरानी रखना है।


रोजाना दो बार मरीजे से जाना जाता है हाल-चाल

कंट्रोल रूम में कार्यरत डॉक्टर हर मरीज को रोज़ाना कम से कम दो बार कॉल कर उसकी मौजूदा स्थिति की भी जानकारी लेते हैं। मरीज की आवाज के जरिये उसके स्वास्थ को परखा जाता है। अगर किसी मरीज की ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 फीसदी से कम हो जाए, पल्स रेट 60 से कम आए और उसे सांस लेने में परेशानी हो तो आरआरटी द्वारा ऐसे मरीज के घर जाकर उसकी जांच की जाती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर उसे अस्पताल भी रेफर किया जाता है।

Published on:
23 Jun 2020 08:33 pm
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