
Kailash Vijayvargiya Statement- मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने और उसके बाद दतिया में हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर भाजपा नेता एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान सामने आया है। जब उनसे नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी के बारे में सवाल पूछा तो विजयवर्गीय ने कहा है कि "पार्टी के अंदर लोकतंत्र है और BJP कार्यकर्ता बहुत अनुशासित हैं। एक बार जब हम उनसे बैठकर बात करेंगे, तो सब साथ आ जाएंगे। मैं अभी कह सकता हूं कि आशुतोष तिवारी भारी अंतर से जीतेंगे।"
दतिया उपचुनाव में शनिवार सुबह नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने 15 किलोमीटर लंबा जाम लगा दिया था। वहीं पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ कर दी थी। पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने लगे। दतिया के एसपी समेत 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
इस विरोध और नरोत्तम की नाराजगी को लेकर सवाल उठने लगे थे कि भाजपा को दतिया चुनाव में नुकसान न हो जाए। इस बारे में जब मीडिया ने कैलाश विजयवर्गीय से बात की तो उन्होंने कहा कि "हम इसे संभाल लेंगे। यह हमारे लिए बहुत छोटी बात है। पार्टी सोच-समझकर फ़ैसले लेती है और इसीलिए हम बड़ी जीत हासिल करेंगे। नरोत्तम जी भी पार्टी के लिए काम करेंगे। मैं यह बात आज ही कह रहा हूं। वह पार्टी के अच्छे और वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। कई लोग चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं। विधानसभा की 230 सीटें हैं और लगभग 2,000 लोग टिकट की चाहत रख सकते हैं। लेकिन, हर किसी को टिकट नहीं दिया जा सकता।"
डबरा क्षेत्र से दतिया तक 33 साल का सियासी सफर रहा है नरोत्तम मिश्रा का। क्षेत्र में उन्हें दादा कहकर संबोधित किया जाता है। 15 अप्रैल 1960 में ग्वालियर में जन्मे नरोत्तम मिश्र के राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा युवा मोर्चा से हुई थी। 1998 में नरोत्तम मिश्रा जीवाजी यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर ग्वालियर स्टूडेंट यूनियन के सेक्रेटरी बन गए थे। डबरा से पहला चुनाव लड़ा और 1990 में पहली बार विधायक बने। वहीं 1998 और 2003 में इसी सीट से जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद डबरा सुरक्षित सीट घोषित हो गई थी। इसलिए नरोत्तम ने दतिया का रुख किया। नरोत्तम 2008 में दतिया से चुने गए और यह सिलसिला 2018 तक जारी रहा। इसके बाद बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री रहे।
2023 में नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस के राजेंद्र भारती से महज 7 हजार वोटों के अंतर से हार गए थे। राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा की पुरानी प्रतिद्वंदिता के चलते यह सीट प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी। हाल ही में कांग्रेस विधायक रहते हुए राजेंद्र भारती को बैंक के एक मामले में सजा हो गई। इसके बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई थी। उसी के कारण दतिया में उपचुनाव हो रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा ने कुछ दिन पहले ही नामांकन फार्म खरीद लिया था और नरोत्तम के साथ ही सभी यह मानकर चल रहे थे कि वे ही यहां से उम्मीदवार बनाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी का फैसला कुछ अलग ही रहा। वहां से पूर्व हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। जिसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार शाम से ही हंगामा शुरू कर दिया था।