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36 साल में पहली बार अपने गढ़ में टिकट रेस से बाहर हुए नरोत्तम मिश्रा, दतिया में भाजपा का नए चेहरे पर दांव

Datia By Election : 6 बार विधायक और पूर्व गृहमंत्री नरोतत्म मिश्रा का टिकट कटा। संगठन के भरोसे उपचुनाव में उतरी भाजपा। अब कांग्रेस प्रत्याशी पर टिकीं प्रदेश की निगाहें। टिकट कटने से नाराज नरोत्तम समर्थक सड़कों पर उतरे। यहां न सिर्फ बाजार बंद कराए, बल्कि जमकर हंगामा कर कई सड़कें जाम कर दीं।
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Datia By Election

Datia By Election (36 साल बाद पहली बार टिकट की रेस से बाहर हुए नरोत्तम मिश्रा Photo source- Patrika)

Datia News : मध्य प्रदेश के दतिया जिले की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए 6 बार के विधायक और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है। उनकी जगह संगठन से जुड़े चेहरे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवारी सौंपी गई है। इस फैसले के साथ ही 36 साल के चुनावी सफर में पहली बार डॉ. मिश्रा टिकट की दौड़ से बाहर हो गए हैं। भाजपा के इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

पार्टी के फैसले से पहले तक माना जा रहा था कि, भाजपा एक बार फिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर ही भरोसा जताएगी। उन्होंने उपचुनाव की तैयारी के तहत लगातार जनसंपर्क अभियान भी शुरु कर दिया था। दर्जनभर से अधिक समाजों की बैठकें की थीं, कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। लेकिन, अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने संगठन के नेता आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारकर उनके अरमानों पर तो पानी फैरा ही, साथ ही प्रदेशभर में जारी सभी अटकलों पर भी विराम लगा दिया।

राजनीतिक सफर 3 बार डबरा से, 3 बार दतिया से जीते

डॉ. नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक सफर साल 1990 में डबरा विधानसभा सीट से पहली जीत के साथ शुरू हुआ था। परिसीमन के बाद डबरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर उन्होंने 2008 में दतिया को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। यहां से वे लगातार 3 बार विधायक चुने गए और प्रदेश सरकार में गृह, कानून, संसदीय कार्य सहित कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा। बाद में राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने से दतिया में उपचुनाव की स्थिति बनी।

भाजपा के सर्वे के बाद बदली सीट, आशुतोष तिवारी पर दांव

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पार्टी के इस फैसले के पीछे संगठन की आंतरिक फीडबैक प्रक्रिया और सर्वे रिपोर्ट को प्रमुख आधार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि, वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी गंभीरता से विचाराधीन था, लेकिन संगठन स्तर पर मिले फीडबैक और बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते पार्टी नेतृत्व ने अंतत: आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सहयोगी संगठन ग्राम भारती के जिला संयोजक रह चुके तिवारी भाजपा में संभागीय संगठन मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वे मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रहे हैं और मौजूदा समय में भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रभारी हैं।

टिकट कटते ही समर्थकों ने शहर का बाजार बंद कराया…हंगामा

टिकट की घोषणा के बाद दतिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। डॉ. मिश्रा के समर्थकों में मायूसी देखी गई और वे सड़कों पर उतर आए और कई जगह बाजार भी बंद कराए। जबकि शहर के कुछ व्यापारियों ने बाजार बंद कर विरोध भी जताया। दूसरी ओर भाजपा संगठन पूरी ताकत से नए प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय हो गया है और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी गई है। डबरा में भी समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं,

2028 तक निगाह…

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है, भाजपा ने इस बार ऐसा चेहरा आगे बढ़ाया है, जिसकी पहचान संगठन के नेता के रूप में अधिक हो और जो प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सके। आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ-साथ 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता देना भी इस फैसले का महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

अब नजर कांग्रेस पर

अब सभी की नजर कांग्रेस पर टिकी है। पार्टी ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह और अवधेश नायक के नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में हैं। भाजपा के नए दांव के बाद कांग्रेस पर भी जल्द प्रत्याशी घोषित करने का दबाव बढ़ गया है।