
इंदौर.
आयकर के नोटिस को लेकर कई करदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति है। इसे स्पष्ट करने के लिए शुक्रवार को टैक्स प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशन द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 148 (रिअसेसमेन्ट) पर सेमिनार का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता सीए मनीष डफरिया ने बताया कि नई व्यवस्था में करदाताओं को यह राहत दी गई है कि 3 साल से अधिक समय बीत जाने की स्थिति में पुन: कर निर्धारण सिर्फ उसी स्थिति में हो सकेगा जब आय 50 लाख रुपए से अधिक है। आयकर की सर्च व सर्वे की स्थिति में भी कर निर्धारण इसी अनुसार होगा। आयकर विभाग को ऐसी कई सूचनाएं मिल रही है जिसमें पिछले वर्षों में कम कर या नहीं चुकाए जाने का उल्लेख है। इस आधार पर आयकर अधिकारी उच्चाधिकारियों की अनुमति लेकर करदाताओं को धारा 148 का नोटिस जारी करेंगे जिसका जवाब 7 से 30 दिन के अंदर देना होगा। जवाब संतोषजनक ना होने की स्थिति में करदाता को संबंधित वर्ष की आयकर विवरणी दाखिल कराते हुए कर निर्धारण किया जाएगा।
कोर्ट से भी मिल सकती है राहत
एडवोकेट व सीए हितेश चिमनानी ने कहा कि यदि नोटिस में कोई प्रक्रियात्मक दोष रह जाता है तो उस दशा में हाई कोर्ट में रिट फाइल कर राहत पाई जा सकती है। इस नए सेक्शन में अभी कई खामी हैं जो आने वाले समय में दुरुस्त होने की संभावना है। कार्यक्रम का संचालन टीपीए के मानद सचिव सीए अभय शर्मा ने किया। स्वागत भाषण टीपीए प्रेसिडेंट सीए शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने दिया। सीए अशोक खासगिवाला, एडवोकेट महेश अग्रवाल, सीए प्रमोद तापडिय़ा, सीए विजय बंसल, सीए अभिषेक गांग, एडवोकेट गोविंद गोयल, सीए अजय सामरिया भी उपस्थित थे।