
Indore news: मौसम के बदलते मिजाज के साथ एमपी के इंदौर शहर में एक बार फिर वायरल फीवर के मरीज बढ़ने लगे हैं। इस बार बुखार के साथ जोड़ों और मांसपेशियों मैं दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और थकान मरीजों की परेशानी बढ़ा रहे है। कई मरीजों को बुखार उतरने के बाद भी बदन दर्द और कमजोरी से राहत मिलने में समय लग रहा है।
एमवायएच की मेडिसिन विभाग की ओपीडी में हर 100 में से 30 से 35 मरीज इन लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल और निजी क्लिनिकों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। हाल ही में बादल, बारिश तो कभी तेज धूप निकलने के दौरान मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिला है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई दे रहा है। बुखार के साथ सर्दी-खांसी, गले में खराश और थकान की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। डॉक्टर समय पर इलाज कराने और मौसम के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
तापमान में उतार-चढ़ाव और बदलती दिनचर्या के बीच श्वसन संबंधी वायरल संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, बुखार के साथ जोड़ों में तेज दर्द होने पर इसे सामान्य वायरल फीवर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य संक्रमणों में भी इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बुखार कितने दिन से है, दर्द कितना तेज है और दूसरे लक्षण क्या है, इसके आधार पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
-अचानक तापमान बढ़ना, ठंड लगना और शरीर में गर्माहट महसूस होना।
-घुटनों, हाथ-पैरों और अन्य जोड़ों में दर्द या अकड़न।
-मांसपेशियों में खिंचाव और पूरे शरीर में दर्द।
-सिर भारी रहना, थकान और कमजोरी महसूस होना।
-कुछ मरीजों में नाक बहना, गले में खराश और खांसी।
-बुखार कम होने के बाद भी थकान और शरीर में दर्द बने रहना।
मौसम में बदलाव का असर लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। ओपीडी में बुखार के साथ हाथ-पैरों में दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीज बढ़े हैं। तेज बुखार, जोड़ों में तेज दर्द या लक्षण लगातार बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इलाज के बाद भी लगातार तीन दिन तक बुखार बना रहे तो जांच की जरूरत हो सकती है। सांस लेने में परेशानी होने पर भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खानपान का विशेष ध्यान रखें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की विशेष देखभाल जरूरी है। डॉ. अशोक ठाकुर, मेडिसिन विभाग, एमवायएच