
E-way Bill rules: जीएसटी से जुड़े कारोबारियों और उद्योगों के लिए राहतभरी खबर है। वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने ई-वे बिल प्रणाली में प्रस्तावित दो बदलावों को लागू करने की तारीख बढ़ा दी है। अब ये नए नियम 15 जून के बजाय 1 अगस्त से लागू होंगे। इससे व्यापारियों, ट्रांसपोर्टर्स और सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाताओं को व्यवस्थाएं अपडेट करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
दरअसल, जीएसटीएन ई-वे बिल प्रणाली में दो बड़े बदलाव करने जा रहा है। पहला, 'बिल-टू/शिप-टू' लेनदेन के मामलों में माल प्राप्त करने वाले (शिप-टू) पक्ष का जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य होगा, यदि वह जीएसटी में पंजीकृत है। दूसरा, माल की डिलीवरी पूरी होने के बाद सप्लायर, खरीदार या ट्रांसपोर्टर को ई-वे बिल को स्वेच्छा से बंद करने की सुविधा मिलेगी।
व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत ने इन बदलावों को लेकर व्यावहारिक और तकनीकी चुनौतियां सामने रखी थीं। उनका कहना था कि नए नियमों के अनुरूप सॉफ्टवेयर, एपीआइ और ईआरपी सिस्टम में बदलाव करने, परीक्षण करने और आवश्यक डेटा अपडेट करने के लिए अधिक समय की जरूरत है। व्यापारिक संगठनों के सुझावों पर जीएसटीएन ने दोनों प्रावधानों की लागू होने की तारीख बढ़ाकर 1 अगस्त 2026 कर दी है।
ई-वे बिल (E-Way Bill) एक इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) डॉक्यूमेंट होता है। ये जीएसटी (GST) के तहत माल (सामान) को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए अनिवार्य होता है। जब आप किसी भी उत्पाद को एक जगह से दूसरी जगह भेजते हैं, तो रास्ते में कर (Tax) चोरी रोकने के लिए सरकार ई-वे बिल के माध्यम से उस पर नज़र रखती है।
अगर माल को 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक ले जाया जाता है, तब इसे जनरेट करना होता है। ई-वे बिल में कई प्रकार की जानकारी भी होती है। इसमें माल भेजने वाले , माल मंगाने वाले का जीएसटी नंबर, चालान/बिल की संख्या, तारीख और माल की कीमत आदि की जानकारी होती है। साथ ही इसमें ट्रांसपोर्टर की आईडी, वाहन का नंबर और परिवहन का माध्यम (सड़क, रेल, वायु या जल) दर्ज होता है।