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एक दशक से समाजसेवा, संवैधानिक जागरूकता और जनहित के अभियानों में सक्रिय, लेखनी और संवेदनशीलता से बनाई अलग पहचान

इंदौर

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Newsdesk

Jul 26, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

इंदौर. कुछ लोग जन्मदिन पर रोशनी और उत्सव मनाते हैं, तो कुछ अपने जीवन को ही दूसरों के लिए रोशनी बना देते हैं। मुरलीधर राहुल मेटांगे ऐसे ही सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने सेवा को अपने जीवन का उत्सव और संविधान को समाज जागरण का संकल्प बना लिया। पिछले एक दशक से वे सामाजिक सरोकारों, जनसमस्याओं के समाधान, संवैधानिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय हैं। उनकी पहचान केवल भाषण देने वाले समाजसेवी की नहीं, बल्कि लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करने वाले कर्मशील नागरिक की है।
स्कूलों-मोहल्लों में नशा मुक्ति, साइबर सुरक्षा के लिए करते जागरूक

समाजिक कार्यकर्ता मेटांगे ने बताया कि कभी अपने जन्मदिन को निजी उत्सव नहीं बनाया। हर वर्ष वे अनाथालय और वृद्धाश्रम पहुंचकर बच्चों एवं बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं। पुलिस के सहयोग से स्कूलों और मोहल्लों में नशा-मुक्ति, साइबर सुरक्षा तथा सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना उनकी नियमित गतिविधियों का हिस्सा है। वहीं नागरिक पत्रकारिता के माध्यम से सडक़, पानी, बिजली, खुले चैंबर और अन्य जनसमस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाकर समाधान की दिशा में पहल करते हैं। जरूरतमंद परिवारों के लिए आरटीई सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन नि:शुल्क भरना भी उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण आयाम है।

डॉ. आंबेडकर का शासकीय कार्यालयों में चित्र भेंट करने का अभियान जारी

सामाजिक कार्यकर्ता मूरली मेटांगे ने आगे बताया कि वर्ष 2016 में स्थापित डॉ. आंबेडकर युग सेवा समिति के माध्यम से उन्होंने शासकीय कार्यालयों में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के चित्र भेंट करने का अभियान शुरू किया, जो आज भी निरंतर जारी है। वर्ष 2018 में नगर निगम के सहयोग से गीता भवन स्थित डॉ. आंबेडकर प्रतिमा परिसर में भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों और अशोक चक्र का शिलालेख स्थापित कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद विद्यार्थियों के लिए करियर मार्गदर्शन, 'विद्यार्थी रत्न अवार्ड', जेल सुधार, संविधान की प्रस्तावना के दैनिक वाचन और कोविड-19 काल में जनजागरूकता जैसे कई अभियानों को उन्होंने जनआंदोलन का स्वरूप दिया।

समाज परिर्वतन बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि सेवा से

कार्यकर्ता मेटांगे ने बताय कि सामाजिक सक्रियता के साथ लेखन और जनसंचार के क्षेत्र में भी अपनी सशक्तउपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। जनजागरूकता लघु फिल्मों के लेखन-निर्देशन से लेकर कई पुस्तकों के प्रकाशन और सैकड़ों सामाजिक लेखों के माध्यम से उन्होंने समाज में सकारात्मक संवाद को नई दिशा दी है। मालव रत्न अवार्ड (2018), भीम रत्न अवार्ड (2026) सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि समाज परिवर्तन बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि निरंतर सेवा, संवेदनशील सोच और अटूट संकल्प से संभव होता है।