
Indore news: अगस्त महीने ने एक बार फिर कस्टमरों का मासिक बजट बिगाड़ दिया है। इसकी मुख्य वजह है खाद्य तेलों में लगातार हो रही तेजी। जुलाई में 138 से 140 रुपए लीटर मिलने वाला सोयाबीन रिफाइंड इस समय 155 से 160 व मूंगफली तेल 185 से 190 रुपए लीटर बिक रहा है। खाद्य तेल हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। भोजन बनाने में इसका बहुतायत में इस्तेमाल होता है। सामान्यत चार लोगों के परिवार में प्रति महीने लगभग पांच लीटर तेल लगता है जिसकी तेजी से रपीब 35 से 40 रुपए का फटका लग रहा है।
ऐसा नहीं कि तेल के भाव ज्यादा हो और अन्य जीवनोपयोगी सामग्री यथा शकर, आटा, तुअर दाल, चावल के भाव में कमी हो बल्कि यह सभी बढ़ चुके हैं। तेल व्यवसायी अशोक अग्रवाल के अनुसार सामान्यतया 14 तारीख तक बाजार में तेजी का दौर रहता है यह वह मौका होता है जब सेलरीज कस्टमर अपनी जरूरत की सामग्री लेता है। 15 के बाद भाव में कमी आने लगती है। लेकिन इस बार तिलहन के अनुमान उम्मीद से नीचे रहे जिसके कारण खाद्य तेल महंगे बिक रहे हैं।
कारोबारी एके. खंडेलवाल के अनुसार मूंगफली तेल गुजरात से आता है। वहां तेजडिय़ों के साथ मंदडिय़ों के सक्रिय होने से तेलों के भाव रोज ही 20 से 30 रुपए प्रति 10 किलो ऊपर नीचे हो रहे हैं जिसके कारण पैक्ड तेल के भाव भी मनमर्जी से ऊपर नीचे हो रहे हैं। दूसरी तरफ महाराष्ट्र लाइन से सोयाबीन रिफाइंड में डिमांड बढऩे से तेजी चल रही है।
कारोबारी लक्ष्मण शर्मा बताते हैं कि इस समय महाराष्ट्र लाइन से कपास्या तेल की उपलब्धता सीमित है। बारिश के कारण अधिकांश जीनिंग फैक्ट्रियां बंद है जिसके कारण स्टाक का तेल महंगा बिक रहा है। महाराष्ट्र तरफ कपास्या तेल 1525 रुपए होने से नमकीन निर्माताओं की हालत बिगड़ी हुई है कारण साफ है उन्हें महंगे दामों पर तेल लेना पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के रेट बढ़ सकते है। बताया जा रहा है कि जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। जिससे रोज की इस्तेमाल की चीजों के दाम तेजी से बढ़ेगे। इससे पहले अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे।