
Indore news: युवाओं में त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। 18 से 30 साल की उम्र के युवाओं में मुंहासे, त्वचा की संवेदनशीलता, जलन, लालिमा और दाग-धब्बों जैसी परेशानियां देखने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों से प्रभावित होकर युवा कई तरह के फेसवॉश, सीरम, सनस्क्रीन और क्रीम का इस्तेमाल करने लगे हैं। वहीं, बिना विशेषज्ञ की सलाह के अलग-अलग कंपनियों के प्रोडक्ट्स एक साथ लगाने, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों में कमी भी त्वचा की सेहत को प्रभावित कर रही है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर दिखने की चाह में किए जा रहे प्रयोग कई बार त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
एमडी त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पित श्रीमाल के अनुसार युवाओं में एक्ने यानी मुंहासे और त्वचा से जुड़ी कॉस्मेटिक समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। पहले कम उम्र में त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत सामान्यत: बेहतर स्थिति में रहती थी, लेकिन अब युवा कम उम्र से ही कई तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगते हैं।
मेकअप, कंसीलर और दूसरे उत्पादों का बार-बार इस्तेमाल त्वचा को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, पिगमेंटेशन, टैनिंग, खुले रोमछिद्र और मुंहासों के निशान भी युवाओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। डॉ. श्रीमाल के अनुसार त्वचा पर दाग-धब्बों, पिगमेंटेशन और मुंहासों के निशान जैसी चुनिंदा समस्याओं के उपचार के लिए उनके क्लिनिक में पिकोसेकंड लेजर तकनीक वाली पिकोरमैक्स मशीन भी उपलब्ध है। त्वचा की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. शुकेन दशोरे के अनुसार युवाओं में संवेदनशील त्वचा की समस्या बढ़ रही है। सोशल मीडिया के विज्ञापन देखकर युवा अलग-अलग कंपनियों के फेसवॉश, सीरम, सनस्क्रीन और एक्सफोलिएटिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। कई बार इन उत्पादों के सक्रिय तत्व त्वचा के अनुकूल नहीं होते या उनका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इससे खुजली, जलन और चेहरे पर लालिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. दशोरे के अनुसार बिना लेबल वाली क्रीम और स्टेरॉयड युक्त उत्पादों का इस्तेमाल भी नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ क्रीम के लगातार इस्तेमाल से त्वचा पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं और उन्हें ठीक करने में लंबा समय लग सकता है। इसलिए विज्ञापनों के आधार पर किसी उत्पाद को अच्छा मानकर इस्तेमाल करने के बजाय त्वचा की जरूरत समझना जरूरी है।