इंदौर

रिटायरमेंट के बाद सहनी पड़ती ‘जनरल कैटेगरी’ की पीड़ा, सैनिकों ने PM से की मांग

MP News: प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से मांग की है कि सैन्य अस्पतालों को और अधिक सशक्त बनाया जाए।

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Apr 14, 2026
Soldiers प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: जब एक जवान सेना में भर्ती होता है, तब उसके लिए न कोई जाति होती है, न कोई वर्ग। उसके लिए सिर्फ एक ही पहचान होती है देश सेवा। सीमाओं पर तैनात रहकर वह अपने परिवार, समाज और हर व्यक्तिगत पहचान से ऊपर उठकर राष्ट्र की रक्षा करता है। कई जवान इस कर्तव्य के निर्वहन में शहीद हो जाते हैं, तो कई वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर घर लौटते हैं।

सेवा समाप्त होने के बाद जब यही जवान आम जीवन में लौटता है, तो उसे एक कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ता है और वह फिर से जनरल कैटेगरी में खड़ा होता है। रिटायरमेंट के बाद जब उन्हें इलाज या अन्य सुविधाओं की जरूरत पड़ती है, तब उन्हें सामान्य नागरिक की तरह ही लंबी कतारों, इंतजार और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। यह पीड़ा पूर्व सेना नायक विमल कुमार, सूबेदार मुकेश मुकाती, महेश पटेल, प्रवीण पटेल, शेखर पटेल, सांवरिया जाट सहित क्षेत्र के तमाम पूर्व सैनिकों ने व्यक्त की है।

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पीएम से की मांग

इन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से मांग की है कि सैन्य अस्पतालों को और अधिक सशक्त बनाया जाए। सेवानिवृत्त सैनिकों को वहीं बेहतर और सहज इलाज की सुविधा दी जाए। नामित अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता और सम्मान के साथ इलाज दें। जनरल कैटेगरी जैसी बाधाओं को समाप्त कर पूर्व सैनिकों के लिए अलग और सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इन पूर्व सैनिकों ने कहा कि खासकर इलाज के दौरान समस्याएं अधिक सामने आती हैं। पूर्व सैनिकों को निजी और नामित अस्पतालों में भी कई बार उचित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

नहीं मिल रही इलाज की सुविधा

जनरल वार्ड में जगह नहीं होने पर उन्हें वापस भेज दिया जाता है या बाद में आने के लिए कहा जाता है। कई जरूरी जांचें भी संबंधित अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है। देश में सैन्य अस्पताल मौजूद होने के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद वहां इलाज की पूरी सुविधा नहीं मिल पाती। इसके बजाय उन्हें ईसीएचएस, पॉलिक्लिनिक के माध्यम से इलाज कराना पड़ता है, वहां भी व्यवस्थाएं सीमित हैं।

रिटायरमेंट के बाद भटकना पड़ रहा

इंदौर संभाग में भी पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में गिने-चुने अस्पताल जैसे मेदांता, चरक, इंडेक्स, शैल्बी हॉस्पिटल इंदौर और अमलतास हॉस्पिटल देवास ही इस योजना से जुड़े हैं, लेकिन यहां भी डॉक्टरों की उपलब्धता और प्रक्रियाओं में देरी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। पूर्व सैनिकों का कहना है कि जो जवान अपने जीवन का सबसे अहम समय देश के नाम कर देता है, उसे रिटायरमेंट के बाद इलाज के लिए भटकना न पड़े यही उसके सम्मान और सच्ची सेवा का प्रतिफल होगा।

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Published on:
14 Apr 2026 05:40 pm
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