इंदौर

‘कश्मीर, जूनागढ़ के राजाओं ने भारत छोड़ो प्रस्ताव का किया था विरोध’

स्वतंत्रता सेनानी कापसे ने सुनाई दास्तां: मूसलाधार बारिश में कांग्रेस अधिवेशन में लिया निर्णय

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Aug 13, 2019
'काश्मीर, जूनागढ़ के राजाओं ने भारत छोड़ो प्रस्ताव का किया था विरोध'

इंदौर. मूसलाधार बारिश हो रही थी। देश की अधिकांश रियासतों के राजा मौजूद थे। सभी को गंाधी-नेहरू-सरदार के आने का इंतजार था। कुछ ही देर में तीनों आए। गांधीजी ने सभा शुरू करते हुए बताया, आज हम बड़ा निर्णय लेने जा रहे हैं। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत करेंगे। इसका प्रस्ताव तैयार किया है।

अब नेहरूजी प्रस्ताव के बिंदु पढक़र बताएंगे। वे खड़े होते इससे पहले ही कश्मीर, जूनागढ़ व कुछ रियासत के राजाओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। नेहरू प्रस्ताव पढ़ नहीं सके। गांधीजी ने तत्काल सरदार पटेल को बुलाकर बिंदु पढऩे के लिए कहा। पटेल ने प्रस्ताव रखा। आखिरकार प्रस्ताव पास कर दिया गया। भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत की गई। यह द्श्य था, मुबंई में 8 व 9 अगस्त को हुए कांग्रेस अधिवेशन का। इंदौर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ दत्तात्रेय कापसे भी वहां मौजूद थे। कापसे बताते हैं, आजादी सब चाहते थे, लेकिन विरोध के चलते निर्णय लेने में देरी हो रही थी। मैं 8 अगस्त को ही मुबंई पहुंच गया था।

देशभर के राजा, कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से अधिवेशन हाल भरा था। बारिश के बाद भी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं था। निर्णय हुआ, आंदोलन की शुरूआत हुई। वहां से लौटकर इंदौर आए। यहां पर स्वतंत्रता आंदोलन चल ही रहा था। महाराजा शिवाजी राव स्कूल, होलकर व क्रिश्चयन कालेज के विद्यार्थी एकत्रित होकर आंदोलन का हिस्सा बनते थे। नेताओं की अगुआई में रैली निकालते और अंग्रेजों का विरोध करते थे। आंदोलन का केंद्र सियागंज का झंडा चौक, राजबाड़ा पर सुभाष चौक होता था। रैली हमारा विरोध का प्रमुख हथियार होता था। जोश इतना होता, सडक़ों से निकलते तो अंग्रेज सिपाही कांपने लगते थे। युवाओं से यही कहना चाहता हूं, आजादी मुश्किलों से मिली।

Updated on:
13 Aug 2019 12:34 pm
Published on:
13 Aug 2019 11:08 am
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