
इंदौर. जीएसटी काउंसिल ने जीएसटीआर-३बी भरने की तिथि को दो दिन आगे बढ़ा दिया, लेकिन इससे मुश्किल कम होने के बजाय, बढ़ गई। पोर्टल पर एसजीएसटी, आईजीएसटी की राशि भरने के बाद समिट करते ही राशि गायब हो रही है, स्क्रीन पर शून्य लिखा आता है, जिससे निल रिटर्न समिट हो रहे हैं। सॉफ्टवेयर में जीएसटी रिटर्न में करेक्ट करने की सुविधा नहीं होने से एेसा होना कारोबारियों के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है। चालू माह का रिटर्न भरने के लिए एक दिन बचा है, यदि नहीं भरा गया तो ब्याज के साथ पेनल्टी लगने लगेगी।
शुरूआती दिनों में जीएसटीएन पोर्टल की दिक्कतों से परेशान कारोबारी और टैक्स प्रेक्टिशनर्स अभी भी साफ्टवेयर की व्यावहारिक कठिनाईयों से जुझ रहे हैं। सोमवार को टैक्स प्रेक्टिशनर्स राज्य कर आयुक्त के पास शिकायत ले कर पहुंचे और बताया, जीएसटी साफ्टवेयर में दिक्कत आ रही है। पोर्टल नहीं चलने के कारण तिथि को दो दिन आगे बढ़ाया गया, लेकिन अभी भी पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है।
रिटर्न समिट करने के लिए गति मिल जाए, इसके लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। गति मिलने पर जीएसटीआर भर कर समिट कर रहे हैं तो राशि गायब हो जाती है। स्क्रीन पर शून्य लिखा आता है। इससे रिटर्न भरने के बाद भी पेडिंग की श्रेणी में आ जाता है। दोबारा ट्राय करने पर फिर वहीं मशक्कत करना होती है, क्योंकि समिट रिटर्न में करेक्शन की सुविधा नहीं है। इसी तरह जीएसटीआर-१ भी डाउनलोड नहीं हो रहा है। इससे काम को बोझ दुगना होते जा रहा है। टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन के एके गौर, अमित दवे, मप्र टैक्स ला बार एसोसिएशन के अश्विन लखोटिया, केदार हेड़ा ने बताया, १५ मई से ही पोर्टल सही काम नहीं कर रहा है। २० को तिथि बढ़ाने के बाद भी पेनल्टी की मांग की जा रही है। राज्य कर आयुक्त पवन कुमार शर्मा ने पोर्टल की समस्याओं को ध्यान से सुना और मौके पर ही संयुक्त आयुक्त सुदीप गुप्ता और हेल्प डेस्क की टीम को बुला कर समस्या हल करने के लिए काउंसिल के विशेषज्ञों से चर्चा करने के लिए कहा। शाम तक सारी समस्याएं उच्च स्तर पर बता दी गई। बताया जा रहा है, यह मुश्किल इंदौर मंे ही नहीं, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर सहित देश के अनेक स्थानों पर आ रही है। कर सलाहकारों ने बताया, अनेक बार समस्याओं को लिख कर साफ्टवेयर को व्यावहारिक बनाने के लिए कहा है।
ये समस्याएं भी
- जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन होने के लिए दो-तीन प्रयास करना होते हैं।
- डाटा अपलोड करने के बाद डाटा नजर नहीं आ रहा है।
- एक बार में ओटीपी नहीं आता है। इससे रिटर्न भरने के लिए लंबा इंतजार करना होता है।
- चालान जमा होने पर पोर्टल पर दोबारा खोल कर देखने पर चालान को बकाया बता दिया जाता है।