
इंदौर. मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा (Surendra Patwa) के खिलाफ सीबीआइ द्वारा दर्ज केस के खिलाफ लगी याचिका पर मार्च में अंतिम बहस होगी। शनिवार को युगल पीठ में इससे जुड़े सभी पक्षों ने अपने जवाब और प्रति उत्तर पेश कर दिए। जस्टिस विवेक रुसिया और अनिल वर्मा ने 28 मार्च को अंतिम बहस के आदेश दिए हैं। एफआइआर दर्ज करने के बाद की कार्रवाई पर रोक लगाने से हाई कोर्ट पहले ही मना कर चुका है। कोर्ट के समक्ष पटवा की ओर से याचिका में संशोधन को लेकर आवेदन पेश किया गया था, उसे भी स्वीकार कर लिया गया है।
29.41 करोड़ का लोन लेकर उसमें धोखाधड़ी करने का आरोप
सीबीआइ (CBI) का कहना है, बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) से धोखाधड़ी के मामले में अक्टूबर 2021 में सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी के ठिकानों से दस्तावेज व अन्य सबूत जब्त करने के बाद उन पर एफआइआर दर्ज की जा चुकी है। फिलहाल और अन्य कार्रवाई नहीं की गई है। सुरेंद्र पटवा (Surendra Patwa) ने सीबीआइ (CBI) की एफआइआर निरस्त करने की भी मांग की है। पटवा दंपती के खिलाफ बैंक ऑफ बड़ौदा से 29.41 करोड़ का लोन लेकर उसमें धोखाधड़ी करने का आरोप है।
सीबीआइ ने जब्त किए थे दस्तावेज
अक्टूबर में सीबीआइ (CBI) ने पटवा के भोपाल, इंदौर के ठिकानों पर जांचकर दस्तावेज भी जब्त किए थे। आरोप है कि सुरेंद्र ने मैसर्स पटवा ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (वर्तमान में भगवती पटवा ऑटोमोटिव) इंदौर के डायरेक्टर रहते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के साथ 29.41 करोड़ रुपए की ठगी की है। बताया गया कि इंदौर स्थित कंपनी ने आइडीबीआइ बैंक से ओवर क्रेडिट की सुविधा ली, इसके बाद 13 सितंबर 2014 को बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा 36 करोड़ रुपए का लोन बढ़ाया। उक्त लोन 2 मई 2017 को एनपीए घोषित कर दिया गया। बाद में आरबीआई को इस जालसाजी की सूचना दी गई थी, जिस पर अब कार्रवाई हुई। इससे पहले भी पटवा पर चेक बाउंस के कई मामलों दर्ज हैं।