
Indore High Court:एमपी के इंदौर शहर में हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक केस की सुनवाई के दौरान इस बात को माना कि पहली पत्नी की हत्या का केस छुपाकर किया गया दूसरा विवाह (नातरा) घरेलू हिंसा है। इसके बाद जस्टिस जस्टिस गजेंद्र सिंह की कोर्ट ने पत्नी और दो बच्चों को मिलने वाले भरण-पोषण की राशि को बढ़ाते हुए पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट में सांवेर में रहने वाले पति और फिलहाल देवास में अपने मायके में रह रही पत्नी ने अलग-अलग केस दायर किया था। इसमें बताया गया था कि उनका नातरा पद्धति से 22 अप्रैल 2010 को विवाह हुआ था। दोनों से दो बच्चों का जन्म हुआ।
महिला ने वर्ष 2014 में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर पति द्वारा प्रताड़ित करने और अपने लिए 7 हजार रुपए प्रतिमाह, दोनों बच्चों के लिए 4-4 हजार रुपए प्रतिमाह और घरेलू हिंसा के कारण एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति की मांग की। केस की सुनवाई में पति ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया। दावा किया था कि पत्नी सिलाई और डेयरी कार्य से कमाई करती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी), देवास ने वर्ष 2018 में पत्नी के साथ घरेलू हिंसा नहीं होने की बात मानते हुए उसकी ओर से दायर केस खारिज कर दिया। पत्नी और बच्चों ने अपील दायर की।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, देवास ने 12 फरवरी 2019 को ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट कर घरेलू हिंसा का शिकार मानते हुए पत्नी को 1500 रुपए प्रतिमाह तथा प्रत्येक बच्चे को 750 रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण और 5000 रुपए क्षतिपूर्ति के आदेश दिए। पत्नी ने इस राशि को कम बताते हुए और पति ने इसे गलत बताते हुए हाईकोर्ट में अलग-अलग अपील दायर की। दोनों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।
कोर्ट ने लिखा है कि पति पर पहली पत्नी की मृत्यु का केस चल रहा था। जानकारी दूसरी शादी के दौरान महिला को नहीं दी। पहली पत्नी की मृत्यु के केस में उसे सात साल की सजा भी हुई। कोर्ट ने माना कि पत्नी के साथ घरेलू हिंसा हुई है और अपीलीय अदालत का निष्कर्ष सही है। हाईकोर्ट ने पत्नी के लिए तय 1500 रुपए की राशि को बढ़ाकर 3000 और बच्चों के लिए 2-2 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया। यह राशि दिसंबर 2014 से ही देनी होगी। इस तरीके से मामले की सुनवाई पूरी की गई।