राज्य सरकार ई-नगर पालिका के जरिए जो सेवाएं आम आदमी को देने की बात कर रही है, इंदौर नगर निगम वे सुविधाएं पहले से ही शहरवासियों को दे रहा है। नए सिस्टम में कई ऐसी सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी, जो लोगों को पहले से ही मिल रही हैं।
1 अप्रैल से इंदौर नगर निगम सहित पूरे प्रदेश की नगर पालिकाओं, नगर निगम, नगर परिषद को कम्प्यूटर के जरिये सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से जोडऩे जा रही है। सरकार का कहना है, इसके लागू होने से आम जनता को कई सुविधाएं ऑनलाइन मिलने लगेंगी और नगर निगमों का कामकाज पारदर्शी हो जाएगा, लेकिन इसे लेकर विसंगतियां भी हैं। सरकार जो सुविधाएं इस सिस्टम के जरिए देने की बात कह रही है, उससे कहीं ज्यादा सुविधाएं इंदौर सहित प्रदेश के कुछ नगर निगम वर्तमान में ही दे रहे हैं।
इंदौर नगर निगम आगे और नया सिस्टम पीछे
में कोई भी व्यक्ति अपने संपत्तिकर खाते का नंबर कम्प्यूटर पर डालकर उसकी पूरी डिटेल यानी कितना टैक्स लग रहा है, किस तरह का टैक्स लग रहा है? कब कितनी राशि भरी, संपत्तिकर बिल आदि ऑनलाइन देख सकता है।
बिल तो दिखेगा, लेकिन खाते की पूरी जानकारी नहीं मिल पाएगी।
के वर्तमान सेटअप में निगम परिषद व नगर निगम मेयर इन कौंसिल के निर्णय भी जनता के बीच सार्वजनिक होते हैं।
नए सेटअप में इसकी व्यवस्था नहीं है।
को लेकर भी नगर निगम के वर्तमान सेटअप मेंं व्यवस्था है, जिसमें कचरा प्रबंधन शुल्क संबंधी पूरा काम होता है।
नए सेटअप में यह नहीं होगा।
में फिलहाल जो व्यवस्था है, उसमें निगम का बजट व उसकी कार्यप्रणाली आपस में लिंक हैं। निगम का पूरा बजट कोडिंग के जरिए तैयार होता है। हर एक मद के लिए अलग से एक कोड है। जैसे ही उस मद में काम होता है, उसमें मौजूद बजट की राशि अपने आप कम हो जाती है।
नए सिस्टम में यह सुविधा नहीं है। इसे अलग से सिस्टम में अपलोड करना होगा, उसके बाद बजट में से वह राशि कम होगी।
में कम्प्यूटराइज्ड जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की बात कही गई है। इंदौर नगर निगम 18 सालों से ऐसे प्रमाण पत्र ही जारी कर रही है।
केंद्र सरकार के नए नियम के मुताबिक जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों का पूरा काम केंद्र सरकार के पोर्टल से होना है। अस्पतालों को जन्मे बच्चों सहित मृतकों की जानकारी पोर्टल पर अनिवार्य तौर से डालना है, जहां से प्रमाण-पत्र नि:शुल्क ही जनता को मिल जाता है।
यह सुविधाएं अफसरशाही की शिकार
निगम में कई सुविधाएं ऑनलाइन करने की व्यवस्था है, पर उसे अफसरों ने ही फेल कर दिया, जिससे ये लागू नहीं हो रही हैं। इनमें जनता की शिकायतों का सिस्टम भी है। मुख्यमंत्री ऑनलाइन की तरह हर व्यक्तिको एक नंबर भी दिया जाना है, लेकिन अफसरों ने कभी कोई व्यवस्था ही नहीं की। इसी तरह निगम वर्कशॉप व सेंट्रल स्टोर्स के लिए भी सिस्टम है, लेकिन अफसर कम्प्यूटर पर काम करने के बजाए रजिस्टर से काम करते हैं। सूचना के अधिकार के लिए भी पूरा सिस्टम है, पर निगम रजिस्टर पर ही काम करता है। शहर की कॉलोनियों के मैनेजमेंट के लिए भी पूरा सिस्टम वर्तमान सेटअप में है। इसमें कॉलोनियों के नक्शे सहित अन्य सुविधाएं हैं, किंतु इसका इस्तेमाल केवल राशि जमा कराने व वैध-अवैध कॉलोनियों की सूची जारी करने से ज्यादा नहीं किया जाता है।
इंदौर निगम के ऑनलाइन सिस्टम की वर्तमान सुविधाए
संपत्तिकर, जलकर, लाइसेंस, किराएदारी संपत्ति, ठेला-गुमटी, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, लेखा शाखा, स्थापना, राशन कार्ड, बिल्डिंग परमिशन, सिटीजन मैनेजमेंट कम्पलेंट, स्टोर्स, वर्कशॉप, केंद्रीय खरीदारी, विधि शाखा, कॉलोनी सेल, जीआईएस कनेक्टिविटी, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंंग सिस्टम, आवक-जावक, स्कीम मॉनिटरिंंग, संपत्तिकर सर्वे, ऑनलाइन भुगतान, सूचना का अधिकार, परिषद और एमआईसी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ई-न्यूज लेटर, अप्रूवल मैनेजमेंट।
अपडेटेड सिस्टम का उपयोग नहीं था
निगम का पहला सिस्टम हो सकता है अपडेट हो, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा था। नई व्यवस्था को भोपाल में कई सालों तक चलाकर देखा है, उससे वहां जनता भी खुश है। राज्य सरकार के स्तर पर यह निर्णय लिया है। उसी हिसाब से काम किया जा रहा है।