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निजी निवेश में सुस्ती और विदेशी पूंजी पलायन पर संसदीय समिति चिंतित, तीन सप्ताह में सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट

Indian Economy: निजी निवेश में सुस्ती और विदेशी पूंजी पलायन पर संसदीय समिति ने चिंता जताई है। समिति तीन सप्ताह में सरकार को अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर रिपोर्ट सौंपेगी।

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Parliamentary committee reviews private investment and foreign capital outflow.

भर्तहरी महताब (Photo/ANI)

Parliamentary Committee: वित्तीय मामलों की संसदीय समिति ने देश में निजी व विदेशी पूंजी निवेश में सुस्ती और विदेशी पूंजी के पलायन पर चिंता जताई है। समिति ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियों के बावजूद, घरेलू बचत बढ़ने जैसे अच्छे संकेत हैं। देश में सरकारी पूंजीगत व्यय तो स्वस्थ स्थिति में है, लेकिन निजी निवेश में तेजी नहीं आई है। यह ऐसी चुनौती है जिसका हमें समाधान करना होगा।

भाजपा सांसद भर्तहरी महताब की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी.अनंत नागेश्वरन और वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर से सवाल पूछे गए। दोनों ने देश की सामान्य आर्थिक स्थिति पर प्रजेंटेशन भी दिया। समिति अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली समस्याओं का विश्लेषण कर तीन सप्ताह में सरकार को समाधान सहित एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। बैठक में सांसद प्रमोद तिवारी, गौरव गोगोई और मनीष तिवारी, पीपी चौधरी मौजूद थे।

युद्ध के प्रभाव पर मांगी जानकारी

समिति के सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव, मुद्रास्फीति के दबाव और चीन द्वारा अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए हाल ही में लागू किए गए कठोर नियमों पर सरकारी अधिकारियों से जवाब मांगा। सदस्यों ने कहा कि चीन से पलायन कर रहे निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है। सदस्यों ने माना कि सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरते मूल्य पर चिंता जताई। अमेरिका से ट्रेड डील वार्ता पर भी चर्चा की।

इस दौरान देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि विकसित देशों, खासकर अमेरिका की ओर विदेशी निवेश का रुझान बढ़ रहा है। इसके अलावा जापान में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण भी वैश्विक पूंजी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तरफ जा रही है। इसका असर उभरते बाजारों पर पड़ रहा है और उनके लिए निवेश आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। वहीं, समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने विश्वास जताया कि भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार और सरकार द्वारा उठाए गए कदम, जैसे कार्पस फंड की व्यवस्था, इन चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होंगे।