
Indore flats demolition:इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 15 साल पहले बनी बिल्डिंगें जीर्णशीर्ण हो गई है। इन बिल्डिंगों में करीब 2024 फ्लैट हैं, जिन्हें गरीब वर्ग के लोगों को आबंटित किया गया है। अब फ्लैटों को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री आवास योजना का काम देखने वाले अफसरों ने तैयार किया है। मेयर-इन-कौंसिल (एमआइसी) की मंजूरी के लिए प्रस्ताव नगर निगम के परिषद कार्यालय में पहुंच गया है। पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मोड पर यह नई बिल्डिंग में फ्लैट बनेंगे। इसके चलते नगर निगम का एक रुपया नहीं लगेगा और बिल्डिंग बनाने वाले बिल्डर को इनकम होगी। इसके लिए बिल्डर को कमर्शियल निर्माण की अनुमति मिलेगी।
जेएनएनयूआरएम के तहत वर्ष 2010 में गांधी नगर क्षेत्र में बहुमंजिला बिल्डिंग बनाई गई थी। नैनोद के खसरा क्रमांक 305/1 के 3.42 हेक्टर एवं बड़ा बांगड़दा के खसरा क्रमांक 285 के 4.340 हेक्टर आबंटित भूमि पर यह बिल्डिंग बनाई गई? जिनमें 2024 फ्लैट बने हैं। इन बिल्डिंग में सीपी शेखर नगर, साउथ तोड़ा और भूरी टेकरी के लोगों को शिफ्ट किया गया है। पिछले महीने 13 सितंबर की रात को एक चार मंजिला बिल्डिंग के भूतल पर बने फ्लैट में जमीन अचानक धंस गई थी। फ्लैट में रहने वाले कन्हैया खराटे अपने परिवार सहित 1 से 2 फीट के गड्ढे में समा गए थे। हादसे के बाद मौके पर एमआइसी मेंबर राजेंद्र राठौर और अश्विनी शुक्ल सहित निगम के अफसर पहुंचे थे, जिन्होंने बिल्डिंगों की हालत को देख तोड़कर फिर से बनाने का फैसला लिया था।
मेंटेनेंस के अभाव में बिल्डिंगों के साथ उनमें बने फ्लैटों की जीर्ण-शीर्ण हालत को देखकर इन्हें तोड़कर नए सिरे से बनाने का फैसला महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने लिया है। इसके चलते उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय आवास एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे से चर्चा भी की थी ताकि गांधीनगर के रहव सियों के लिए पुर्नविस्थापन के लिए परियोजना स्वीकृत हो सके। नगरीय आवास एवं विकास विभाग के आयुक्त भोंडवे के निर्देश पर ही गांधी नगर क्षेत्र में पुरानी जर्जर बिल्डिंगों को तोड़कर पीपीपी मोड पर नई बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। बिल्डिंग का निर्माण शुरू करने से पहले उनमें रह रहे लोगों की शिफ्टिंग और निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें दोबारा आवासों में बसाने की व्यवस्था निगम को करना है।
गांधी नगर क्षेत्र की बहुमंजिला इमारतों में बने वन बीएचके फ्लैट में जिन लोगों को शिफ्ट किया गया है, उन्होंने आज तक एक रुपया निगम को नहीं दिया है। लोगों को फ्लैट 1.80 लाख रुपए में दिए गए थे, जिन्हें बार-बार तगादा किया गया पर पैसा जमा नहीं हुआ।
निगम के अफसरों का कहना है कि गांधी नगर क्षेत्र में बने फ्लैट मेंटेनेंस के अभाव में बर्बाद हो गए। फ्लैट में रहने वाले लोग गंदगी करने के साथ अनाज फेंकते हैं, इस कारण चूहे हे रहे हैं। चूहे जमीन को खोखला कर रहे हैं। रहवासी संघ बनाकर फ्लैटों का मेंटेनेंस करने का कहा गया, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ और 15 साल में ही बिल्डिंगें बर्बाद हो गई। वैसे, रहवासियों ने घटिया निर्माण होने का आरोप लगाया है।
पीपीपी मोड पर बनने वाली नई बिल्डिंग में फ्लैट देने से पहले लोगों से 2 लाख रुपए लिए जाएंगे। जो लोग यह राशि नहीं देंगे उन्हें फ्लैट नहीं मिलेगा। इस बात की पुष्टि प्रधानमंत्री आवास योजना के अफसरों ने की है। उनका कहना है कि राज्य शासन की गाइड लाइन के हिसाब से पैसा लिया जाएगा।