Government Jobs: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गलत दस्तावेज लगाने वाले प्रतियोगी की किसी भी चरण में उम्मीदवारी खत्म की जा सकती है।
MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर खंडपीठ ने सरकारी नौकरियों में भाग लेने वालो के लिए एक निर्णय दिया है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने साफ कहा है कि वयस्क होने के बाद किसी उम्मीदवार को अपने नाम से डोमिसाइल (स्थायी निवास) प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। पिता के नाम से जारी डोमिसाइल प्रमाणपत्र को वयस्क उम्मीदवार के लिए वैध नहीं माना जा सकता। खासकर, तब जब मामला सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हो। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गलत दस्तावेज लगाने वाले प्रतियोगी की किसी भी चरण में उम्मीदवारी खत्म की जा सकती है।
सोनकच्छ में रहने वाले योगेंद्र सिंह गुर्जर ने एक याचिका दायर की थी। गुर्जर ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) पश्चिमी क्षेत्र में जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विसेज) पद के लिए अपनी उम्मीदवारी खारिज किए जाने को इस याचिका में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि एएआइ ने 11 फरवरी 2025 को नॉन एग्जीक्यूटिव पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें स्पष्ट किया था कि उम्मीदवार का महाराष्ट्र, गुजरात, मप्र या गोवा का डोमिसाइल होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का जन्म 4 अक्टूबर 2000 को हुआ था और उसने निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन किया था। हालांकि, आवेदन करते समय अपने नाम का डोमिसाइल प्रमाणपत्र अपलोड करने के बजाय अपने पिता लक्ष्मण सिंह गुर्जर का 14 जून 2016 को जारी प्रमाणपत्र अपलोड कर दिया।
इसके बाद अभ्यर्थी ने 6 जून 2025 को आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा पास कर ली और उसे दस्तावेज सत्यापन के लिए 31 जनवरी 2026 को वडोदरा एयरपोर्ट बुलाया गया। सत्यापन के दौरान अपने नाम से 5 जनवरी 2026 को जारी डोमिसाइल प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया, लेकिन यह आवेदन की अंतिम तिथि 24 मार्च 2025 के बाद का था। सत्यापन समिति ने उम्मीदवारी नकार दी कि उसने निर्धारित कटऑफ तिथि से पहले अपने नाम का वैध डोमिसाइल प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा, वर्ष 2016 में जब उसके पिता का डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी हुआ था, तब याचिकाकर्ता नाबालिग था. लेकिन भर्ती के लिए निर्धारित कटऑफ तिथि तक वह वयस्क हो चुका था, इसलिए उसे अपने नाम से डोमिसाइल प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक था। अदालत ने कहा, भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवेदन करते समय ही डोमिसाइल प्रमाणपत्र अपलोड करना अनिवार्य था और यदि कोई उम्मीदवार गलत दस्तावेज अपलोड करता है तो उसकी उम्मीदवारी किसी भी चरण में निरस्त की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इसी कारण से लगभग 15 अन्य अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी भी रद्द की गई थी। अदालत ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में पात्रता शर्तों का सख्ती से पालन जरूरी है और किसी एक उम्मीदवार को राहत देने से अन्य उम्मीदवारों के साथ भेदभाव होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उम्मीदवार की याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। (MP News)