
Ultrasonic Test :मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सनावद से गुजरने वाले इंदौर - इच्छापुर फोरलेन परियोजना के निर्माणाधीन खिड़किया नदी पुल की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बाद जांच प्रक्रिया तेज हो गई है। पिछले दिनों पुल के एक हिस्से में गड्ढा होने की घटना सामने आने के बाद मामला दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मुख्यालय तक पहुंचा। इसके बाद एनएचएआई के निर्देश पर शुक्रवार को विजिलेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर पुल का निरीक्षण किया।
टीम ने पुल की मजबूती और कंक्रीट की गुणवत्ता परखने के लिए अल्ट्रासोनिक नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (एनडीटी) किया। इस तकनीक से बिना किसी नुकसान के संरचना की आंतरिक स्थिति और संभावित तकनीकी खामियों का आकलन किया जाता है। जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से दिल्ली मुख्यालय भेजी जाएगी।
विजिलेंस टीम ने करीब तीन घंटे तक पुल के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। विशेष रूप से उस स्थान की जांच की गई, जहां क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर दोबारा कंक्रीट डाली गई थी। अधिकारियों ने आधुनिक उपकरणों से गुणवत्ता और संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण किया।
कुछ दिन पहले निर्माणाधीन पुल के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया था। एनएचएआई ने प्रारंभिक जांच में इसे भारी वाहन का एक्सल टूटने से हुई घटना बताया था। वहीं निर्माण कंपनी का कहना है कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित हिस्से को स्वयं हटाकर सुधार कार्य शुरू किया गया था और इसकी जानकारी पहले ही एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई थी।
निर्माण कंपनी के प्रतिनिधि शिवा रूद्रा ने कहा कि परियोजना में सभी तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा है और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि विजिलेंस जांच का कंपनी स्वागत करती है। फोरलेन परियोजना पूरी होने के बाद सड़क और पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण कंपनी के पास रहेगी।
परियोजना के धनगांव से बलवाड़ा तक के हिस्से में फिलहाल फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्य जारी हैं। निर्माण कंपनी ने लोगों से अपील की है कि कार्य पूरा होने तक निर्माणाधीन फोरलेन का उपयोग न करें, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके और निर्माण कार्य सुरक्षित तरीके से समय पर पूरा हो सके।