
Indore Kidnapping Case Update: गार्डन में खेल रहे दो बच्चों के अपहरण की खबर सुनने के बाद मोहल्ले में हर कोई इंसानियत की मिसाल पेश करता दिखा। परिवार का दर्द कम करने पूछताछ करते रहे। बच्चे को तलाशने में मदद करने लगे। जब फिरौती की बात सुनी तो घबरा गए। विपरित समय में किसी ने हिम्मत नहीं हारी। पूरा मोहल्ला परिवार की तरह साथ खड़ा रहा। बच्चे की मां अपहरणकर्ता से कहने लगी कि यहां कोई गन्ने का चरखी चलाता है तो कोई काम पर जाता है। हम कैसे इतनी बड़ी राशि घंटेभर में इकट्ठा करेंगे। परिवार ने मदद के लिए हर किसी को कॉल किया। मां के आंसू देख सभी का दिल पसीज गया। परिवार को किसी ने 10 हजार तो किसी ने 20 हजार की मदद की। जैसे ही छह लाख एकत्रित हुए तो परिवार ने बच्चे को छोड़ने के लिए उक्त राशि देने की बात कह दी।
आरोपी 15 लाख पर अड़े रहे तो परिवार की उम्मीद टूट गई। वे अपहरणकर्ता से चैटिंग पर कहते रहे कि अब वे अधिक राशि देने में असमर्थ है। इस बीच अचानक पुलिस अधिकारी और बल गायब हो गया। हर कोई स्तब्ध था कि अब क्या होगा। बच्चे के दादा तो कहीं दादी इधर-उधर घूम कर उनके सकुशल मिलने की विनती करते रहे। मंदिर के बाहर बैठे रहे। हर कोई सीसीटीवी फुटेज देख बच्चे के सकुशल मिलने और उन्हें ले जाने वाली युवती को कोसता नजर आया।
थाने में केस दर्ज करवा रही मां के चेहरे पर तब खुशी लौट आई जब उन्हें पता चला कि उनके जिगर के टुकडे को पुलिस ने सकुशल ढूंढ लिया है। परिवार ने पुलिस की कार्रवाई की तारीफ की। कमिश्नर ने बच्चों को उपहार में बैग व अन्य सामग्री दी।
एसीपी तुषार सिंह टीम के साथ गार्डन के पास जांच को पहुंचे। वहां मौजूद परिजन व लोगों से कहा कि बच्चों को बचाना है तो फिरौती की रकम जोड़ कर भेजने की तैयारी करें। हम हमारा प्रयास कर रहे हैं। एसीपी ने इस दौरान दोनों बच्चों के साथ गार्डन में खेल रहे हमउम्र दोस्तों से भी बात की। वे पूरे समय परिवार के साथ आरोपियों से चैट भी करते रहे। राधिका ऑनलाइन टैक्सी कर बच्चों को अपने साथ दत्त नगर स्थित शिवांग अपार्टमेंट ले गई। उस दौरान उसका भाई विनीत वहीं मौजूद था। उसने पल-पल की जानकारी राधिका को वाट्सऐप चैट पर दी।
यहां से राधिका व अन्य आरोपियों ने अपना खेल शुरू कर दिया। आरोपियों ने बच्चों से उनकी मां का नंबर लिया। उन्हें कॉल किया और कहा कि आप वाट्सऐप पर संपर्क करो। मां ने कहा कि उनके मोबाइल में वाट्सऐप नहीं है। इस पर उसने दोनों बच्चों का अपहरण करने और फिरौती में 15 लाख नहीं देने पर उनको काटकर फेंकने की धमकी दे डाली। पुलिस को सूचना के साथ उन्होंने पड़ोसी महिला के मोबाइल से आरोपियों से संपर्क किया। यहीं से पुलिस ने अपनी तकनीकी जांच शुरू कर दी।
देर रात टीम आरोपियों को पकडऩे दत्त नगर पहुंची तो बहुत सारे मकान मिले। लोकेशन में गफलत होने पर टीम इधर-उधर तलाशती रही। इस दौरान अचानक स्ट्रीट लाइट गुल हो गई। अंधेरा होने पर टीम ने देखा कि एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट की लाइट ऑन है। वहां लगी ग्रीन नेट से कोई ताका-झांकी करता नजर आया। हलचल होने पर टीम को संदेह हुआ। टीम ने उक्त फ्लैट में रात ढाई बजे दबिश दी तो बच्चे सकुशल मिल गए।
रहवासियों से टीम ने पूछताछ की। सीसीटीवी फुटेज निकाले। एक युवती बच्चों को ले जाती दिखी। उसने एक दुकान से बच्चों को चिप्स, टॉफी और पानी की बोतल दिलाई। वह बच्चों को फोन पर डॉग, बिल्ली के बच्चों की तस्वीर दिखाकर बहला-फुसलाकर ले गई। इस दौरान अपहृत बच्चे की मां के पास कॉल आया। कॉल पर बच्चों को छोड़ने के लिए 15 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। धमकी दी कि रात 11 बजे तक फिरौती की रकम नहीं दी, तो बच्चों की हत्या कर देंगे। टीम ने समय रहते आरोपियों की धरपकड़ कर ली। उन्हें रिमांड पर लेकर की जा रही है।
नैतिक सोनकर ने बताया कि गार्डन में मिली युवती ने फोन पर बिल्ली के बच्चे दिखाकर कहा था कि वह तुम्हेंं फ्री मेंं बिल्ली दे देगी। वह इस झांसे में आ गया और उसके साथ चल दिया था।
एसीपी सिंह ने पड़ोसी के मोबाइल फोन से पीडि़त परिवार बनकर चैटिंग की। आरोपी बोले- यदि पैसे रात 10.30 बजे तक नहीं मिले तो, दोनों बच्चों को काटकर फेंक देंगे। आरोपियों ने वाट्सऐप पर दोनों बच्चों के वीडियो बनाकर भेजे। यहीं से शंका हो गई कि अपहरणकर्ता लोकल बदमाश हैं। इस कारण परिवार को सभी के सामने फिरौती की रकम एकत्रित करने की कहानी गढ़ी गई।
छह लाख से अधिक रुपए एकत्रित करने की बात भी हुई। आरोपियों ने चैटिंग पर कहा कि पैसा बच्चों के माता-पिता लाएंगे, वो भी थाली में सजाकर। इससे अंदाजा हो गया कि गैंग प्रोफेशनल नहीं है। टीम ने आरोपियों को चैटिंग के दौरान ट्रैक कर उनकी लोकेशन को निकाला और दबिश देकर पकड़ लिया।
टीआइ एसएस रघुवंशी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि राधिका और उसके भाई विनीत को पैसों की जरूरत है। राधिका निजी कंपनी में जॉब करती है। विनीत पूर्व में एडवाइजरी कंपनी में कंसल्टेंंट था, फिलहाल बेरोजगार है। वह परिवार से अलग किराये के घर में रहता है, वहीं राधिका माता-पिता के साथ रहती है। कैट रोड क्षेत्र में जब उनका मकान बन रहा था, तब राऊ क्षेत्र में राधिका-तनीषा का परिवार पास में ही रहता था। राधिका भाई विनीत के साथ तिलक नगर क्षेत्र में घूमती थी।
दोनों तिलक नगर स्थित ज्वेलरी शॉप में वारदात का प्लान बना चुके थे, लेकिन गैंग में सदस्यों की कमी से वारदात कैंसल कर दी। टीआइ रघुवंशी ने बताया, एक दिन जूस पीने के बाद राधिका और विनीत पालतू पशु घुमाने गार्डन पहुंचे, जहां तीन बच्चों से मुलाकात हुई। दो बच्चे उनके झांसे में आ गए। उनको लगा कि दोनों बच्चे बच्चे संभ्रांत परिवार के हो सकते हैं। इस पर राधिका ने प्लान के तहत वारदात को अंजाम दिया।
उसको नहीं पता था कि एक बच्चे के पिता जूस बेचने तो दूसरे के बैंड में काम करते हैं। वह बच्चों के परिजन को अमीर समझकर 15 लाख फिरौती मांगने लगी। राधिका और उसके भाई का साथ सेन दंपती ने दिया। ये भी पता चला है कि जिस फ्लैट में दंपती रहते थे, वे उसका किराया भी नहीं देते थे।